खुशियों की दास्तां नाबार्ड योजना से राजेन्द्र का डेयरी व्यवसाय का सपना हुआ पूरा

Jan 28 2020

 
 
ग्वालियर 28 जनवरी 202 युवा कृषक श्री राजेन्द्र पाल अपनी लगनए मेहनत एवं शासन की योजना का लाभ लेकर एक सफल डेयरी व्यवसायी बने हैं। इसके साथ ही 22 जरूरतमंदों को इस व्यवसाय से रोजगार भी दे रहे हैं। यह सब संभव हुआ है नाबार्ड की डेयरी विकास योजना से । 
ग्वालियर जिले की मुरार जनपद के ग्राम बिजौली निवासी कक्षा.12वीं तक शिक्षित युवा श्री राजेन्द्र पाल का दुग्ध पालन का पुश्तैनी व्यवसाय था। श्री राजेन्द्र का सपना था कि उनकी भी एक आधुनिक दूध डेयरी हो। लोगों को शुद्ध एवं पौष्टिक तत्वों से भरपूर दूध मिले। लेकिन अपना कैरियर टेलीकॉम सेक्टर में ठेकेदारी से शुरू किया। जिसमें मन नहीं लगा। उनकी इच्छा थी पुश्तैनी दूध उत्पादन के व्यवसाय को आगे बढ़ायें। शुरू में ग्राम बिजौली में गिरि प्रजाति की चार गायों से छोटे स्तर पर डेयरी शुरू की। गाँव में स्वयं की जमीन होने के कारण पशुओं के लिए हरे चारे की किसी प्रकार की दिक्कत न आए। इसके लिए पाँच भैंसों से भैंस पालन शुरू किया। जो बढ़कर अब 150 पशु हैंए जिसमें 100 भैंस एवं 12 गायें शामिल हैं। इनसे प्राप्त होने वाला 1100 लीटर दूध की शुरू में प्रतिदिन विक्रय की परेशानी थी। श्री राजेन्द्र पाल ने डेयरी व्यवसाय को पूरी वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने हेतु नाबार्ड बैंक के अधिकारियों से चर्चा की। बैंक के अधिकारियों ने बताया कि नाबार्ड बैंक की डेयरी विकास योजना का लाभ लेकर डेयरी व्यवसाय को आधुनिक संयंत्रों के माध्यम से आगे बढ़ा सकते हैं। इसके लिए दुग्ध प्रोसेसिंग प्लांट के लिए बैंक से ऋण की सुविधा प्राप्त हो सकी। इस प्रकार योजना के तहत आधुनिक दुग्ध प्रोसेसिंग इकाई के लिए 80 लाख का ऋण कैनरा बैंक से स्वीकृत हुआ। जिस पर 6 लाख की अनुदान राशि का लाभ लेकर दुग्ध प्रोसेसिंग इकाई शुरू की। जिसमें प्रतिदिन 1100 लीटर दूध प्रोसेसिंग एवं पैकिंग उपरांत ग्वालियर शहर में विक्रय हेतु लोडिंग वाहनों से भेजा जा रहा है। 
श्री राजेन्द्र पाल ने बताया कि पशुओं को जैविक हरा चारा खिलाते हैं। जो स्वयं के खेत में ही उत्पादि करते हैं। उन्होंने बताया कि श्नेचुरल मिल्क ब्राण्डश् नाम से दूध की पैकिंग के दौरान स्वच्छता के साथ पोषक तत्वों का विशेष ध्यान रखा जाता है। दूध की गुणवत्ता एवं अच्छे स्वाद के कारण उपभोक्ताओं के बीच में दूध की मांग बढ़ी है। डेयरी व्यवसाय से हो रही आय से एक लाख 25 हजार के बैंक ऋण की किस्तें भी नियमित जमा करने के उपरांत 60 से 70 हजार रूपए प्रतिमाह का मुनाफा भी हो रहा है। श्री राजेन्द्र का कहना है कि डेयरी उद्योग के तहत युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार की अपार संभावना हैं। आवश्यकता है कि योजनाओं का लाभ लेकर मेहनत कर इस व्यवसाय से स्वयं के साथ अन्य जरूरतमंदों को भी रोजगार दे सकेंगे। 
 
उप संचालकए अनूप सिहं भारतीय