योग करने से एकाग्रचित्तता के द्वारा विजय प्राप्त की जा सकती है: करकरे

Jan 28 2020

ग्वालियर। एकाग्रचित होकर कार्य करने से कार्य सार्थक होता है। यह एकाग्रचित्तता व्यक्ति को योग करने से प्राप्त होती है। इसीलिए स्वामी विवेकानन्द योग करने पर अधिक बल देते थे। ध्यान को केन्द्रित कर कार्य करने की क्षमता उसी व्यक्ति में होती है जो स्वस्थ मस्तिष्क का होता है। यह गुरूदीक्षा स्वामी विवेकानन्द को अपने गुरू रामकृष्ण परमहंस से प्राप्त हुई जिसका उन्होंने पालन किया। यह बात माधव महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आयोजित व्या यान में संजय करकरे ने कही। स्वामी विवेकानन्द के बारे में जितना जाना जाये उतना ही कम है क्योंकि स्वामी विवेकानन्द जैसा महापुरूष सदियों में एक ही बार जन्म लेता है। स्वामी विवेकानन्द की व्या यान माला कार्यक्रम में मु य अतिथि व मु य वक्ता संजय करकरे वानप्रस्थी कार्यकर्ता स्वामी विवेकानन्द केन्द्र ग्वालियर, अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. मनोज चतुर्वेदी, वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संजय कुमार पाण्डेय राष्ट्रीय सेवा योजना माधव महाविद्यालय व प्राध्यापक डॉ. शिवकुमार शर्मा उपस्थित थे।
करकरे ने बताया कि नरेन्द्र ने अपने जीवन के बाद भी लोगों को निरन्तर प्रेरित करने का कार्य किया। यदि हम उनके बताये गये मार्ग पर चलते हैं तो हमारा जीवन सफल व सार्थक होगा। हम समाज से हर तरह की कट्टरता और बुराइयों को दूर करने में सफल हो सकते हैं इसके लिए हमें परिश्रम करना पड़ेगा। स्वामी विवेकानन्द ने वैराग्य व ज्ञान का रास्ता अपनाया था। वह हमेशा कर्म को प्रधानता देते थे। यह युवा भी स्वामीजी के बताये गये मार्गदर्शन पर चले तो सफलता अवश्य प्राप्त कर सकते हैं।
डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि विश्व में स्वामी विवेकानन्द ने भारत को इन ऊँचाइयों तक ले गये जिन्हें लोग आज भी याद रखते हैं। वह ऐसे व्यक्ति थे जिनके जीवन से हम सदैव कुछ न कुछ सीख सकते हैं यही कारण है कि आज भी वे युवाओं में इतने लोकप्रिय बने हुये हैं।  
इस कार्यक्रम में स्वयं सेवक संजय यादव, करन बरुआ, तरुण रोहिरा, अंजली गोयल, अंकुर चौरसिया, योगेश्वर माहौर, अनुभव दीक्षित, अनिरुद्र शर्मा, वैष्णवी शर्मा, प्रियंका किरार आदि लोग उपस्थित हुये।