आईटीएम ग्लोबल स्कूल में पॉक्सो एक्ट पर वर्कशॉप आयोजित

Jan 20 2020

ग्वालियर। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि भारत के 53 फीसदी से ज्यादा बच्चों ने यह स्वीकार किया है कि उनके साथ एक या एक से अधिक प्रकार से यौन शोषण हुआ है। 50 फीसदी से ज्यादा बाल यौन शोषण के मामले घरों में होते हैं। यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर 4 में से 1 लड़की और हर 7 में से एक लड़का यौन शोषण का शिकार हुआ है। इसके बाद भी हम सेक्स या सेक्सुअलिटी के बारे में बात करने से संकोच करते हैं। डरते हैं कि कहीं बच्चे बिगड़ न जाएं। हमारे पास शब्द नहीं है समझ नही है। बच्चे को समझना जरूरी है कि सेफ या अनसेफ सिचुएशन कौन सी हैं। अब तो पॉक्सो एक्ट आने से हम उन्हें ज्यादा सुरक्षित और न्यायिक महसूस करवा सकते हैं।Ó
कुछ ऐसी ही जानकारी दे रहे थे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरपर्सन डॉ केके दीक्षित, वे एफपीआई के सहयोग से चाइल्ड वेलफेयर कमेटी द्वारा आईटीएम ग्लोबल स्कूल में आयोजित एक दिवसीय वर्कशॉप को स बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी तक यौन अपराधों और लैगिंक अपराधों में फर्क नहीं किया गया था। सिर्फ यौन अपराध आईपीसी की विभिन्न एक्ट के तहत कवर किए जाते रहे हैं। लड़को के साथ हो रहे लैंगिक अपराधों को एड्रेस करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी।   
इस कानून के अंतर्गत बच्चों को सेक्सुअल असॉल्ट, सेक्सुअल हरेसमेंट और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान की गई है। दोनों ही स्थितियों जहां बच्चे के साथ लैंगिक शोषण की घटना हुई है या होने की संभावना है। इस कानून के अंतर्गत आने वाले मामलों की सुनवाई विशेष न्यायलय में होती है।