मामा मानिकचंद वाजपेयी नागरिक पत्रलेखन एवं पत्रकारिता स मान का आयोजन

Jan 20 2020

ग्वालियर। नागरिकता संशोधन कानून में स्पष्ट है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले अल्पसं यक पीडि़तों को भारत में नागरिकता दी जाएगी। इसमें भारत में रहने वाले किसी भी नागरिक के अधिकारों का कतई हनन नहीं होगा। जहां तक एनआरसी की बात है तो वह उच्चतम न्यायालय के आदेश पर सिर्फ असम में लागू है। जिसका पूर्वोत्तर राज्यों में वोट बैंक के कारण विरोध किया जा रहा है। इसमें भारत में रहने वाले मुस्लिमों की नागरिकता जाने का भ्रम फैलाया जा रहा है। वहीं एनपीआर की तो अभी कोई बात ही नहीं है, उसकी तो प्रक्रिया तक शुरू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि देश में गुजरात ने दो गांधी दिए पहले महात्मा गांधी और वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। मोदी ही असली गांधी हैं, हमें नकली गांधी की बातों में आने की आवश्यकता नहीं है। यह बात इंदौर से आए सिद्धार्थ शंकर गौतम ने मामा माणिकचंद वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास द्वारा राष्ट्रोत्थान न्यास भवन के विवेकानन्द सभागार में नागरिक पत्र लेखन, पत्रकारिता स मान समारोह एवं नागरिकता संशोधन कानून एवं भ्रांतियाÓ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मु य वक्ता के रूप में कही। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सांसद विवेक शेजवलकर ने कहा कि मुस्लिमों में साजिश के तहत भ्रम फैलाया जा रहा है। टीवी पर वृद्धजन और बच्चे कह रहे हैं कि मोदी हमें एक टाइम खाने को देंगे, देश से निकाल देंगे? इस देश में क्या यह संभव है। इस तरह की भ्रांतियों में आने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि 10 जनवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून राष्ट्रपति द्वारा मंजूर किए जाने के बाद क्या देश में कोई संकट आया है? फिर इस बात को इतना तूल क्यों दिया जा रहा है। कार्यक्रम संयोजक दिनेश चाकणकर भी मंचासीन रहे। दीपक भार्गव ने प्रस्तावना प्रस्तुत की। वहीं बालिका संस्कृति भदौरिया ने भी अपनी बात रखी। निर्णायक जयसिंह तोमर, एवं रामकृष्ण उपाध्याय रहे। 
पलक चौहान ने मारी बाजी
पलक चौहान ने स्तंभ लेखन एवं पत्र लेखन में बाजी मारी। उन्हें पत्र लेखन में प्रथम और स्तंभ लेखन में तृतीय पुरस्कार मिला। इसके साथ ही स्तंभ लेखन में प्रथम डॉ. दीप्ति गौड़, द्वितीय राजकिशोर वाजपेयी, विशेष पुरस्कार गोविंद प्रसाद गौड़ को मिला। पत्र लेखन में द्वितीय सत्यप्रकाश शुक्ला, तृतीय गौरव वाजपेयी और विशेष पुरस्कार कृष्णा शर्मा को दिया गया।