ठंड ने कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ा

Dec 30 2019

 ग्वालियर। इस बार की ठंड ने कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दिसंबर के महीने के अंतिम दिनों में ग्वालियर में इतनी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। जिले की ठंड कई पहाड़ी क्षेत्रों के करीब पहुंचने से जनजीवन कांप उठा है। मौसम विभाग के मुताबिक जाते साल में पारा जैसे जैसे गिरता जा रहा है सर्दी के पुराने रिकार्ड टूटते जा रहे हैं। सर्दी के सितम से जनजीवन बेहाल है। चाहें जितने भी गर्म कपड़े क्यों न लोग पहन लें, घरों से बाहर निकलने पर उनकी कंपकंपी छूट रही है। सोमवार को महानगर कोहरे की चादर से ढका रहा।
हालांकि, जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे कोहरा कुछ कम होता गया। आठ किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से हवाएं चलीं एक ओर दो जनवरी को सर्दी से कुछ राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि एक जनवरी को न्यूनतम तापमान 13, दो और तीन को 11-11 डिग्री सेल्सियस पहुंच सकता है। इससे सर्दी में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, शुरूआती दो दिनों में बारिश की भी संभावना है। चार जनवरी से फिर से न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस पहुंच सकता है। ऐसे में सर्दी फिर सताएगी। शहर के जिन प्रमुख स्थलों पर आश्रयविहीन लोग ठंड में आग का सहारा खोजते हुए एकत्र होते हैं, उनमें रेलवे स्टेशन, महाराज बाड़ा, फूलबाग, पड़ाव, हजीरा समेत एक दर्जन से ज्यादा मु य स्थानों पर नगर निगम द्वारा अलाव लगाए जाते हैं।
शीत ऋ तु अपने शबाब पर है, लेकिन नगर-निगम द्वारा कुछ दिन अलाव जलाए गए। एक-दो दिन के बाद शहर के किसी भी चौराहे, सार्वजनिक स्थल पर अभी तक नगर-निगम ने अलाव की व्यवस्था संभव हो पा रही है। ऐसे में बाहर से आकर मजदूरी करने वाले, भिक्षावृत्रि कर जीवन-यापन करने वाले और यात्रियों के लिए बिना आग के सहारे रात काटना मुश्किल हो रहा है। ठंड के चलते ऐसे लोग बड़ी सं या में सर्दी, जुकाम, निमोनिया, बुखार व अन्य बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
फसलों को बचाने कृषि विभाग ने दी किसानों को सलाह 
शीतलहर और तापमान में भारी गिरावट की संभावनाओं को देखते हुए पाला पडऩे की आशंका के मद्देनजर कृषि विभाग ने फसलों को इसके प्रकोप से बचाने के लिए सलाह जारी की है। उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास पीसी पटेल के मुताबिक पाला से दलहनी एवं सब्जी वर्गीय फसलें अधिक प्रभावित हो सकती हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए कृषकों को सलाह दी गई है कि खेतों में हल्की सिंचाई करें एवं रात्रि में 12 से 2 बजे के बीच मेढ़ों पर कचरे को जलाकर धुआं करें तथा फसलों पर सल्फर का 0.1 प्रतिशत घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। इससे फसलों पर पाला का प्रभाव कम हो जाता है। उप संचालक कृषि ने पौधशाला के पौधों एवं क्षेत्र वाले उद्यानों व नगदी सब्जी वाली फसलों को टाट अथवा पालीथिन अथवा भूसे से ढंकने का सुझाव भी दिया है। उन्होंने वायुरोध टाटियां को हवा आने वाली दिशा की तरफ से बांधकर क्यारियों के किनारे पर लगाने की सलाह दी है तथा दिन में पुन: हटाने को कहा है।