भगवान प्रेम और सत्संग से प्रसन्न होते हैं रामसुखदास जी महाराज

Dec 24 2019

ग्वालियर 24 दिसंबर मंगलवार को हरियाणा के कलानौर से पधारे सती भाई सई दास जी की गद्दी से पधारे श्री रामसुखदास जी महाराज अपने द्वितीय दिवस के आशीष प्रवचनों में अपने शिष्यों एवं भक्तों को बताया कि मनुष्य दान करने में धन खर्च करके अगर बार-बार बतलाता है तो वह दान किसी काम नहीं आता है क्योंकि भगवान या गुरु आपके धन और दान से प्रेम नहीं करते वह आपकी अंतरात्मा के भाव से जो प्रेम दिखता है उससे प्रेम करते हैं दान एवं सहयोग वह होता है जो दाएं हाथ से करें तो बाएं हाथ को भी मालूम ना पड़े इसी के साथ उन्होंने अपने प्रवचन में यह बताया कि मनुष्य को पशु पक्षियों की सेवा गौ सेवा, असहाय व्यक्ति कि सेवा एवं बड़ों का आदर करना चाहिए और अगर मनुष्य हृदय से और लगन से ईश्वर की पूजा करें तो ईश्वर को भी पा सकता है और इससे पूर्व भक्तों द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया गया जिसमें गुरु के चरणों में गुरु भक्ति की वंदना कर आनंद लिया कार्यक्रम के आयोजन से पूर्व गुरु जी का स्वागत वंदन श्री बलवंत मदान नरेश अरोड़ा किशन लाल भुटियानी हरिओम नागपाल रवि अनेजा दिलीप गूग नानी गोपाल बत्रा हरीश गुगनानी दीपक बतरा विशाल बत्रा रवि बत्रा ओमप्रकाश कथूरिया मोहनलाल अरोरा तिलकराज बेरी अशोक बत्रा देवराज भुटियाणी राजकुमार बड़जात्या महेश भुटियाणी महेश अरोरा मनोहर सचदेवा जवाहर सचदेवा सुरेंद्र बत्रा मनोज भुटियाणी अशोक गूगनानी बलदेव खुराना एवं समस्त पंजाबी समाज के भक्तजनों ने किया