संसार में महावीर हो चाहे राम हो, उन्हें खोजने की आवश्यकता नही है-आचार्यश्री

Dec 24 2019

 ग्वालियर। संसार में महावीर हो चाहे राम हो, उन्हें खोजने की आवश्यकता नही है। यदि खोजना है तो राम के भाई भरत के हृदय को खोजो। आज के वर्तमान परिवेश में भरत के हृदय को खोजने की जरूरत है क्योंकि भाई के प्रति अपना सिर टेक देना बहुत कठिन बात है। उक्त विचार आचार्यश्री विशुद्ध सागर ने आज मंगलवार को ग्वालियर से सोनागिर की ओर मंगल विहार के दौरान जौरासी बालाजी कॉलेज में व्यक्त किए।
   आचार्यश्री ने कहा कि इतिहास के पन्नों को पढना बहुत सरल है। रामायण, महाभारत और बेद पुराण पढना बहुत ही सरल है लेकिन इतिहास बनना बहुत ही कठिन है। इतिहास बनने के लिए कभी भी रावण, कंस जैसा कृत्य नहीं करना, बल्कि राम-श्याम और महावीर जैसा कृत्य करोगे तो इतिहास स्वमेव बन जाता है, क्योंकि इतिहास बनवाया नहीं जाता और न ही बनाना पढ़ता, अपितु बन जाता है। उन्होंने कहा कि बने इतिहास का उदाहरण देखना है तो मिलो राम के भाई भरत से, क्योंकि भरत जैसा हृदय बनाना बहुत कठिन है। तत्समय यदि भरत ने अयोध्या का सारा राजपाट मिलने के उपरंात भी कभी भी अपने आपको राजा के रूप में स्वीकार नहीं किया और राजरू का संचालन अवश्य किया, लेकिन अयोध्या के सिंहासन पर चरण पादुका रामचंद्र की ही स्थापित की। इसलिए यह इतिहास बना। आचार्यश्री विषुद्ध सागर महाराज के चरणो में विहार संघपति राजेष जैन (लाला), उमेष जैन, प्रवक्ता सचिन जैन, विपुल जैन, राकेष जैन, कमल जैन, वीरेंद्र जैन, एवं जागरण युवा मंच, राजेश लाला मित्र मंडली आदि ने श्रीफल समर्पित ंिकए। गुरू-शिष्य का भव्य वात्सल्य महामिलन संगम हुआ, गुरू के पादप्रक्षालन किए।