चाहने से कुछ नहीं मिलता, चाहने से मिलता तो संसार में कोई भी गरीब नही होता : आचार्यश्री

Dec 20 2019

 ग्वालियर। जगत में आकर इस राग-रंग को शाश्वत मानकर नहीं बैठना, ये सब संयोग हैं और संयोग का वियोग निश्चित है। संयोग पर्याय का है, पर संयोग के साथ वियोग भी जुड़ा हुआ है। जो संयोग को शाश्वत मान लेता हैं, वही  वियोग होने पर रोता है, दु:खी होता है। जय पुण्य का उदय होता है, भवितत्यता निर्मल होती है तो संयोग भी पवित्र-निर्मल सहज ही मिल जाते है। कामना से कार्य की पूर्ति नहीं होती है, कार्य की पूर्ति तो पुण्य के उदय से होती हैं। चाहने से कुछ नहीं मिलता, क्योंकि चाहने से मिलता होता तो संसार में कोई भी गरीब नही होता। जगती पर सामग्रियॉ अल्प हैं और लोगो की आकांक्षायें अंनत है। यह विचार आचार्यश्री विषुद्ध सागर महाराज ने शुक्रवार को दिगंबर जैन जागरण युवा संघ ग्रेटर की ओर से चल रहे नई सड़क स्थित तेराहपंथी धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
   आचार्यश्री ने आगे कहा ंिक नर देह को प्राप्त करना फिर भी सरल है, परंतु नर देह प्राप्त करके नरोत्तम बनना, नारायण बनना पुरूशार्थ साध्य है। संसार के सुख-दु:ख देने वाले है। वह सुख सुख नही जिसकें उपरांत दु:ख भरा हो। जग्त को व्यवस्थित करने जाओगे तो आपको युग बीत जायेंगे, पर आप जग्त को व्यवस्थित नहीं कर पाओगे, जग्त की व्यवस्था को व्यवस्थित करने का असफल प्रयास मत करो, अपितु अपने भावों को व्यवस्थित करलो तो बहुत अच्छा होगा। जग्त में नाना जीव है, उनके अनेक प्रकार के भाव है। आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज के चरणो में जागरण युवा मंच के अध्यक्ष महेद्र जैन, मंत्री भूपेश जैन, कोक्षाध्यक्ष नीरज जैन, सुनील लोहिया, दिनेश जैन, राहुल जैन, मनोज जैन, सागर जैन आकाश जैन, जीतू जैन, आदि ने श्रीफल समर्पित ंिकए।