व्यक्ति अच्छे कार्य करना नहीं चाहता और अच्छे कार्यो के फल को चाहता है

Dec 17 2019

 ग्वालियर। व्यक्ति अच्छे कार्य करना नहीं चाहता और अच्छे कार्यो के फल को चाहता है। पुण्य करना नहीं करना चाहता, पाप छोडऩा नही चाहता, पर पुण्य का फल प्राप्त करना चाहता है। संसारी प्राणी मोह-राग द्वेश में लंपट होकर घोर घोर दु:खो को सहन कर रहा है। सुख चाहने से सुख नहीं मिलता। दु:ख के कारणो को छोंड़कर सुखभूत कार्यों एवं पवित्र विषुद्ध परिणामों सें सुख प्राप्त होता है। धर्म से सुख चारित्र से षांति प्राप्त होती है। जो उत्तम सुख की प्राप्ति करा दे वही धर्म है। संसार के दु:खों से छोड़कव जो उत्तम शाश्वत सुख का प्रदाता है वही समीचीन धर्म है। दया से विशुद्ध होता है, वही सही धर्म है। यह विचार आचार्यश्री विषुद्ध सागर महाराज ने मंगलवार को नई सड़क स्थित तेराहपंथी धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
 आचार्यश्री ने आगे कहा कि श्रद्धा की ऑख जिसके पास है वही पूज्य पुरुषों में पूज्यता देख पाता है। श्रद्धा से अंध मानव सत्य धर्म को भी स्वीकार नही कर पाता है। वह धर्म धर्म नहीं जिससें कर्म बंध हो। जो यथार्थ है सत्य है वही धर्म है। धर्म में आतंक नही, धर्म में सा प्रदायिकता नही, धर्म हिंसा नही, धर्म कूरता नही, धर्म तो समीचीन श्रद्धा ज्ञान आचरण है। जिसकी श्रद्धा समीचीन, ज्ञान, स यक और चारित्र निर्मल होता है वह रत्त्रय धारी आत्म साधना से कर्म कलंक को क्षयकर शाश्वत शांति के धाम सिद्धत्व को प्राप्त करता है।
दीप प्रज्वलित एवं आचार्यश्री को शास्त्र भेंट किया
    धर्मसाभ का शुभारंम संदीप जैन अजय जैन जिनेश जैन भोपल एवं रविसेन जैन व सुनील जैन भिंड ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंम किया। आचार्यश्री विषुद्ध सागर महाराज के पादप्रक्षालन संजय जैन वारिश जैन एवं शास्त्र सुनील जैन सौरभ जैन ने भेंट किए। संचालन भानू जैन व संस्था के अध्यक्ष महेन्द्र जैन ने किया। मंत्री भूपेश जैन, नीरज जैन दिगंबर जैन जागरण युवा संघ, मुरार सकल जैन समाज ने श्रीफल चढ़ाकर अशिर्वाद लिया।
21 फुट भगवान शांतिनाथ का महामस्तकभिशेक देखकर जयकारों से गूॅज उठा पंडाल  
 श्री दिग बर जैन बीसपंथी बडा मंदिर प्रबंधक कमेटी ग्वालियर के तत्वाधान में  मंगलवार को आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज एवं 24 साधुओ पिच्छी के सानिध्य एवं प््रातिश्ठाचार्य पंडित चन्द्र प्रकाश जैन के मार्ग दर्षन में श्रद्धालुओ ने शांतिनाथ भगवान पांचअमृत से महामस्तकभिशेक किया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि 21 फुट की विशाल प्रतिमा शांतिनाथ भगवान का पंचअमृत महामस्तकभिषेक में हजारों इन्द्रों नें सिर पर मुकुट लगकर व पीले वस्त्र धारण कर महामस्तकभिशेक किया।