भविष्य को सुधारना चाहते हो तो अपने वर्तमान के परिणामों को संभालो-आचार्यश्री

Dec 15 2019

ग्वालियर। ज्ञानियो परिणामों की शुद्धि ही मुक्ति का कारण है। विशुद्ध भावों से की गई साधना ही भाव समुद्र से पार उतारती हैं। भविष्य को सुधारना चाहते है तो अपने वर्तमान के परिणामों को संभालो। निज के पवित्र परिणामों ही प्रभु की भक्ति गुरूसेवा में सहायक हैं। निज परिणामों से ही व्यक्ति परमात्मा बनाता है। यह विचार आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज ने रविवार को नई सड़क स्थित तेराहपंथी धर्मशाला में मंगल प्रवेश पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
   आचार्यश्री ने आगे कहा कि अहिंसा ही मंगल है, अहिंसा ही धर्म है और अहिंसा ही सुख का करण हैं अहिंसा से ही विश्वशांति स भव है। विश्व एकता का कोई मंत्र है तो वह अहिंसा ही है। तीर्थंकारों भगवंतो ने अहिंसात्यक धर्म का उपदेश दिया है जियो और जीने दो यही धर्म का सार है। गोपालचल पर्वत जैन संस्कृति का मुकुट है, यह हमारे जैन भक्तो की भक्ति, प्ररिश्रम दान- त्याग का प्रतिका है। स्वर्ण मंदिर जैन संस्कृति की ध्वज के समान षोभायमान है। यहॉ पूर्व काल रइदु आदि विष्व प्रसिद्ध कवि हुए हैं। 
 जैन संस्थाओ ने श्रीफल भेंट कर आर्शीवाद लिया
    आचार्यश्री के चरणो मे आयोजक श्री दिगंबर जैन युवा जागरण मंच के इंजी. भरत जैन, पंडित अजीत कुमार शास्त्री, अध्यक्ष महेन्द्र जैन सचिव भूपेश जैन एवं जैन मिलन ग्वालियर, पुलक जन चेतन मंच सहित ग्वालियर जैन समाज शाखाए, भिंड, दिल्ली, राजस्थान, इन्दौर, आगरा आदि ने श्रीफल चढ़ाकर आशिर्वाद लिया। 
भगवान महावीर एवं विराग सागर के चित्र का आनवण के साथ शुभारंम
    जैन समाज के  प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि कार्यकम का शुभारंम मंगल चरण कु. खुशी जैन ने नृत्य कर किया। भगवान महावीर एवं आचार्यश्री विराग सागर महाराज के चित्र का अनावरण चंद्रेश जैन परिवार एवं चित्र समक्ष दीप प्रज्वलित अजीतकुमार शास्त्री एवं इंजी भरत जैन ने किया। आचार्यश्री के पादप्रक्षालन कमल कुमार जैन परिवार एवं शास्त्र भेंट ओमप्रकाश जैन भिंड ने किए। शीतलवचन कलश की स्थापना संदीप जैन ने की। आचार्यश्री लिखी सदज्ञान देशन का विमोचन ंिकया गया। संचलान आदित्यमणि व उमेश जैन ने किया
आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज के आगमान पर जैन समााज का उमड़ा जनसैलाब
आचार्यश्री विषुद्ध सागर महाराज सहित 24 पिच्छी का भव्य मंगल प्रवेश शोभायात्रा आज रविवार को नया बाजार स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर से गाजे बाजे के साथ निकाली गई। यह मंगल प्रवेश यात्रा नया बाजार से शुरू होकर हुजरात रोड, दौलतगंज, पारखजी का बाड़ा, सराफा बाजार, महाराज बाड़े, मोर बाजार, दाना ओली, से होते हुए नई सड़क स्थित तेराहपंथी धर्मशाला पहुॅचेगी। 
   आगवानी मे बैंड एवं तासे की ध्वनी मे भक्ति नृत्य करने वाले भक्ति से भरे युवावर्ग जोशीले शब्दो में गुरूदेव के जयकारों से संपूर्ण मार्ग को गुंजायमान कर रहे थे। आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज ससंघ जिन मार्गो से निकाल उस मार्ग पर गुरूभक्तो का जन सैलाब उमड़ा पड़। आचार्यश्री का जगह जगह स्वागत गेट लगाकर जैन समाज के श्रद्धालृओ ने पुष्पवर्श कर उनका भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओ ने अपने प्रतिष्ठानों एवं निवास पर रंगोली सज्जा कर रखी थी। जब आचार्यश्री ससंघ उनके द्वारा से गुजरे तो भक्तो ने चरणों को धोकर एवं आरती उतार कर आषिर्वाद लिया। 
प्रवेश में बुलेट, हाथी, घोडे, बाग्गी व महिलाओ का जयघोश बैंड हु आ स मालित
    आचार्यश्री के मंगल प्रवेश में सबसे आगे घोडे और गजराज हाथी पर राजेद्र जैन जैनध्वज लहराते थे। युवा टीम बुलेट गाडी पर साफे पहने हुए चल रहे थे। जिनवाणी लेकर बग्गियों पर सवार थे। मुनिसुव्रतनाथ महिलाएं और विद्यासागर धर्म प्रभावन के पुरूषो जयघोश बैंड आकर्शित रहा। महिलाऐ सिर पर पगड़ी बाधकर डाडिया नृत्य कर रही थी।
आचार्यश्री के प्रवचन एवं यह कार्यकम होगे आयोजित
   जैन समाज के  प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री विषुद्ध सागर महाराज संसघ के प्रवचन प्रतिदिन नई सड़क तेराहपंथी धर्मषाला में प्रात 8:30 से होगे।