-पनिहार श्री षांतिगिरी अतिशय क्षेत्र आमीगांव में वार्शिक मेंला महामस्तिकाभिशेक महोत्सव सपंन्न हुआ श्रद्धालुओ ने भगवान षांतिनाथ, आदिनाथ, कुंथुनाथ, और अरहनाथ के महामस्तकाभिषेक के अतिंम दिन उमडे़ षांतिगिरी अतिशय क्षेत्र आमीगांव के वार्शिक मेंला महामस्तकभिशेक का आज समापन हुआ

Dec 11 2019


  ग्वालियर। पनिहार के समीप षांतिगिरी प्राचीन अतिशय क्षेत्र आमीगांव में वार्शिक मेंला महामस्तिकाभिशेक महोत्सव के आज अतिंम दिन बुधवार को जैन समाज के धर्मावलंबियों ने कलशों से अति प्राचीन खड़गासन भगवान षांतिनाथ, भगवान आदिनाथ, भगवान कुंथुनाथ, और भगवान अरहनाथ की प्रतिमाओ का 108 मंत्रो से जलधार से महामस्तकाभिषेक जयकारे के साथ गूंजे। भगवान के मस्तक पर विषेश शांतिधारा की गई। महामस्तकाभिषेक के उपरांत 108 दीपको से महाआरती की गई। कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष पी.सी जैन, कार्यध्यक्ष पं0 संतोश जैन, सचिव अषोक कुमार जैन, राजेंद्र जैन कोशाध्यक्ष, एवं सहसचिव डाॅ ललिता जैन सहित कमेटी के पदाधिकारी मौजूद थे।
इंद्रो इंद्राणियो ने अग्निकुंड में आहुति देकर विष्वषांन्ति की मनोकामना की
     जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि वेदी प्रतिश्ठा से पूर्व पहले महोत्सव के प्रतिष्ठाचार्य संतोश कुमार जैन एंव सहप्रतिष्ठचार्य विकर्स षास्त्री पन्ना ने मंत्रउच्चरण के साथ विधि संस्कार के साथ ंभगवान जिनेन्द्र का अभिशेक एवं षांतिधारा इंद्रो ने जयघोश के साथ की। महोत्सव के अतिंम दिन भगवान जिनेद्र के समक्ष विष्वषंान्ति महायज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें इंद्रा-इंद्राणियों ने मंत्रउच्चारण के साथ अग्निकंुड में आहुति डालकर भगवान जिनेन्द्र से विष्वषांन्ति की मनोकामनाएं की। ढोल और तासे के साथ इंद्रो ने अपने सिर पर नवीन भगवान की प्रतिमाओ को रखकर लेकर निकाले।
इंहोने मिल वेदी प्रतिमाएं विराजमान करने सौभाग्य
षांतिनाथ के जयकारो से मंदिर प्रागण गूंज, संगीत भक्ति झूमे श्रद्धालु
          जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मंदिर की नवनिर्माण वेदी में मूल नायक भगवान षांतिनाथ की जिन विम्ब प्रतिमा कपूरचंद अनिल दिनेष जैन परिवार मुरैना ने विराजमान की। दूसरी प्रतिमा भगवान पद्मप्रभु की जिनविम्ब प्रतिमा ट्रस्टी के अध्यक्ष पी.सी जैन परिवार ग्वालियर ने की। तीसरी प्रतिमा भगवान अजितनाथ की पं0 संतोश कुमार जैन परिवार स्थापिक की। नवनिर्मित वेदी में भगवान विराजित होते ही मौजूद लोगो भगवान षांतिनाथ के जयकारे गूजें व संगीतमय भक्ति नृत्य करने लागे।