मासूम अंशिका ने बारह घंटे मृत माता-पिता के साथ गुजारे
Nov 25 2019
ग्वालियर। माधौगंज थाना क्षेत्र के बारह बीघा तिलक नगर में गत दिवस पत्नी अंशु की हत्या करने के बाद पति सत्येन्द्र के स्वयं को गोली मारने के बाद माधवगंज थाना पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। पुलिस को अभी पीएम रिपोर्ट नहीं मिली हैं।
कुल-मिलाकर अब पूरा घटनाक्रम मासूम अंशिका को मालूम है, पुलिस उससे पूछताछ भी कर रही है। अभी जो सामने आयी है उसमें सत्येन्द्र और अंशु का विवाद हुआ था। विवाद का कारण कुछ दिन पूर्व एक विवाह समारोह है जिसमें सत्येन्द्र का उसमें शामिल नहीं होना बताया जा रहा है। अंशु ने इसको लेकर कुछ कहा तो सत्येन्द्र ने शराब पी और विवाद गहरा गया। सत्येन्द्र के माता-पिता धार्मिक यात्रा पर चित्रकूट गए थे। वे भी सूचना मिलने के बाद आ चुके हैं।
सूत्र बताते हैं कि अपने पिता रामसिंह चौहान (पूर्व फौजी) और माता के सामने वह अंशु से झगड़ा नहीं करता था, शराब का सेवन भी वह छिपकर करता था। दोनों में छोटी-छोटी बात पर विवाद होता था तो रामसिंह समझा देते थे। सवाल यह भी है कि कैसे दस से बारह घंटे तक मासूम अंशिका ने मृत माता-पिता के साथ गुजारे, वहीं उसकी क्या मनोस्थिति रही होगी।
जानकारी में पता चला है कि सत्येन्द्र और अंशु का विवाह पांच वर्ष पूर्व हुआ था। लगभग 25 लाख रुपए का सामान और नकदी अंशु के पिता अभयराज भदौरिया पूर्व कंपनी कंमाडेंट ने दिया था। सत्येन्द्र के दो बड़े भाई हैं वे भी दोनों सेना में हैं। सत्येन्द्र कोई काम नहीं करता था। पिता की पेंशन पर्याप्त थी, वहीं पिता ने उसके नाम पर 20 बीघा जमीन नाम कर दी थी। जिससे भी आमदनी होती थी। वहीं उसके दोनों भाई उससे प्रेम करते थे। एक भाई ने उसे कार भी गिफ्ट में दी थी। कुल-मिलाकर रुपए पैसे या दहेज की मांग को लेकर कोई विवाद सामने नहीं आया है। वहीं दूसरी तरफ जब पुलिस और अन्य के द्वारा गेट तोड़ा गया तो अंशिका के हाथ में मोबाइल था और उसके दोनों पैर में खून लगा था। फोरेंसिक एक्सपर्ट आनंद पाण्डेय ने जांच की तो सामने आया है कि मासूम अंशिका ने मम्मी-पापा को जमीन पर पड़ा देख कई बार उठाने का प्रयास किया था। इस दौरान उसके पैर फर्श पर फैले खून से बिगड़ गए। खून लगे पैरों से अंशिका घर के अन्य कमरों में गई है। जिसके निशान पुलिस को मिले है।
अब अंशिका रोकर कह रही है मम्मी-पापा के पास जाना है
सोमवार सुबह से ही अंशिका अपने दादी की गोद से हिल नहीं रही है। उसका रो-रोकर बुरा हाल है। एक ही बात वह अपनी दादी से पूछ रही है कि उसके मम्मी-पापा कहां है, मुझे उनके पास ले चलो। पास ही के रहने वाले मृतक सत्येन्द्र के एक दोस्त ने बताया कि उसे शराब पीने की लत पड़ गई थी। हम उसे कम पीने की सलाह देते थे। दोनों के बीच में इतना बड़ा विवाद भी नहीं था कि इतना बड़ा कदम उसने उठाया। पड़ताल में सामने आया है कि तिलक नगर अभी नया बस ही रहा है। आसपास खेतनुमा प्लाट हैं, व मकान भी दूर-दूर तक बने हैं। जब गोली चलाई होगी तो किसी ने आवाज नहीं सुनी होगी।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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