अपमानित होने पर धैर्य नहीं खोना चाहिये : शास्त्री

Nov 20 2019

ग्वालियर। फोर्ट रॉड स्थित पोस्ती खाना सब्जी मंडी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा सुनाते हुए कथा व्यास पंडित ब्रजमोहन शास्त्री ने सती चरित्र के प्रसंग को सुनाया ओर कहा कि भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा। 
साथ ही कथा में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए शास्त्री ने समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की बहुत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न् करने की कथा कहते हुए शास्त्री ने बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं होती है। भक्ति को बचपन में ही करने की बच्चो को प्रेरणा देनी चाहिए। क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद्भागवत का करने और सुन्न्क से श्रेष्ठ कोई उपाय नही है। अजामिल उपाख्यान के साथ ही प्रहलाद चरित्र के बारे में विस्तार से सुनाया और कहा कि भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाडक़र प्रगट हुये क्यो कि प्रहलाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी है और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए एवं हिरण्यकश्यप का वध कर प्रहलाद के प्राणों की रक्षा की। कथा के दौरान शास्त्री जी ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी