युवा उत्सव में छात्र-छात्राओं ने मीडिया के सोशल साइड इफैट्स बताये

Nov 15 2019

ग्वालियर। आजकल मॉब लिंचिंग की घटनाएं असर सुनाई देती हैं। कभी बच्चा चोरी के नाम पर तो कभी किसी के नाम पर। मॉब लिंचिंग का शिकार अक्सर निर्दोष लोग भी हो जाते हैं। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अवेयरनेस जरूरी है। इसी तरह से आजकल युवा पीढ़ी सोशलसाइट की आदी हो गई है। वह फेसबुक, व्हाट्सएप, गूगल आदि में इतना खो गया है कि इसके कारण वह घर या समाज की घटनाओं से अपडेट नहीं हो पा रहा। वर्तमान में समाज में घट रही इस तरह की ज्वलंत समस्याओं को कुछ मिनटों के रोल प्ले के माध्यम से समाज और युवापीढ़ी को संदेश देने की कोशिश की। उनके प्ले को देखते हुए बीच-बीच में ऑडियंस भी भावविभोर हो गई। मौका था अंतर जिला विश्वविद्यालय स्तरीय युवा उत्सव के दूसरे दिन का। 6 विधाओं के तहत 29 टीमों ने भाग लेकर अपने टैलेंट का परिचय दिया। इस अवसर पर जेयू के छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. केशव सिंह गुर्जर मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन आदर्शन  सिमोलिया ने किया।
एक चि_ी नाम से हुई एकांकी में युवा कलाकारो ने शिक्षा का महत्व बताया। इसमें बताया गया कि गांव के एक गरीब, अनपढ़ माता-पिता के पास फौज से एक चि_ी आती है, जिसे पढ़वाने के लिए वो गांव के चौधरी सहित कई लोगों के पास जाता है। दो- तीन दिन गुजरने पर भी वह चि_ी कोई नहीं पढ़ता। इसके उलट उस व्यक्ति से काफी काम करा लिया जाता है। अंत में एक स्कूली छात्रा उस चि_ी को पढ़ती है, जिसमें उनके बेटे के शहीद होने की सूचना होती है, तब उन्हें अपने अनपढ़ होने का पछतावा होता है। नाटक के अंत में करूण रस ने सब को भाव-विभोर कर दिया।
इसी तरह से सोशल मीडिया नाटक के माध्यम से बताया गया कि आजकल युवा सोशल मीडिया पर ज्यादा व्यस्त हो गया है। युवा पीढ़ी इस वर्चुअल दुनिया में इतनी खो गई है कि उसे समाज और देश की घटनाओं की कोई जानकारी ही नहीं है।
सेरोगेसी की समस्याको उजागर किया
रबड़ी नाटक के माध्यम से सेरोगेसी की समस्या को उजागर किया गया। इसमें बताया गया कि एक महिला सेरोगेट मदर बनना चाहती है। वह जिस बच्ची को जन्म देती है, वो मंदबुद्धि होती है, फलस्वरुप उसके असली माता-पिता उस बच्ची को स्वीकार करने से मना कर देते हैं। काफी परेशानी के बाद वो महिला ही उस बच्ची को पालना स्वीकार करती है। इस नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि सेरोगेसी से होने वाले बच्चे में डिफेक्ट होने पर माता-पिता उसे स्वीकार नहीं करते।