बाल दिवस पर छात्रों ने लिया कुष्ठ से निडर ग्वालियर बनाने का संकल्प

Nov 14 2019

ग्वालियर। कुष्ठ साधारण रोग होने के बाद भी आज समाज में कलंक के रूप में जाना जाता है अर्थात समाज के प्रबुद्ध वर्ग के मन से भी कुष्ठ रोग से जुडी भ्रान्ति, भय समाप्त नहीं हुआ है ऐसी स्थिति में हम केवल दवाएं दे कर भारत को कुष्ठ  मुक्त नहीं बना सकते। कुष्ठ मुक्त भारत के लिए हमें आम जन की सोच बदलना होगी अर्थात कुष्ठ  छुआछूत से होता है, पूर्व जन्मों के पाप का फल है व लाइलाज है वगैरा वगैरा जैसी भ्रांतियां समाज से दूर करना होंगीं। उक्त उदगार सामजिक व्यवहार परिवर्तन विशेषग्य बी. शर्मा ने कहे।
ग्वालियर को कुष्ठ से निडर बनाने की दिशा में 2 अक्टूबर गांधी जयन्ती से प्रारंभ किये गए अभियान -कुष्ठ से निडर ग्वालियर मिशन - 20 20 के तहत, गुरुवार 14 नवम्बर बाल दिवस के अवसर पर कुष्ठ ज्ञानी विद्यालय कार्यक्रम का आयोजन जिला स्वस्थ्य समिति ग्वालियर  व संस्था फेमिली हेल्थ इन्डिया के संयुक्त तत्वाधान में शा. उ. मा. विद्यालय -जनकगंज में किया गया।
इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित जिला कुष्ठ अधिकारी डा. बिंदु सिंघल द्वारा उपस्थित छात्रों व स्टाफ को कुष्ठ के चिन्ह-लक्षणों के विषय में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि आम तौर पर शरीर पर दिखने वाले सफ़ेद दाग कुष्ठ नहीं होता, शरीर पर त्वचा से हलके व गुलाबी रंग का दाग या धब्बा जिसमे सुन्नपन हो अर्थात जहाँ ठन्डे -गर्म का एहसास ना हो अंग व स्थान को कुष्ठ रोग से ग्रसित माना जा सकता है। कुष्ठ रोग की दवा रूष्ठञ्ज से -कुष्ठ पूरी तरह से ठीक हो जाता है और ये छुआछूत की बीमारी भी नहीं है साथ रहने से भी नहीं होता।
जिला समन्यवक फेमिली हेल्थ इंडिया विजय मिश्रा ने बताया कि कुष्ठ रोग मुक्त भारत बनाने के लिए हमें अपनी व समाज की सोच बदलना होगी इसी प्रयास में घर घर तक ये सन्देश पहुचाने के उद्देश्य कुष्ठ ज्ञानी विद्यालय बनाने की शुरुआत की गयी है।
कार्यक्रम के दौरान कहानी व चित्रों के माध्यम से सहभगियों को कुष्ठ रोग से जुड़े सत्य तथ्यों से अवगत कराया गया और अंत में सभी सहभागियों ने कुष्ठ जानकार बनकर अपने शहर को कुष्ठ से निडर बनाने का संकल्प लिया। आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय स्टाफ, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं छात्रों सहित लगभग 150 सहभगियों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई।