लोक चित्रकला स्वच्छता संवाद अभियान ग्रामीण महिलाओं के रोजगार का जरिया बना

Nov 13 2019

ग्वालियर। लोक चित्रकला में स्वच्छता संवाद अभियान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अपनी चित्रकला प्रदर्शन के लिए ऐसा मंच मिला है कि इस कला से ग्रामीण क्षेत्रों में चित्रकला स्वच्छता संवाद के जरिए स्थानीय स्तर पर ही ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। बनाए गए लोक चित्रों के माध्यम से गाँव की महिलाओं में स्वच्छता के प्रति जागृति बढ़ी है। महिलायें घरों में बने शौचालय का उपयोग करने के साथ घर के कूड़े-कचरे को नाडेप में डालकर कम्पोस्ट खाद भी बना रही हैं। 
ग्वालियर जिले के घाटीगाँव जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सिमिरियाटांका में  आजीविका मिशन की स्व-सहायता समूह की महिला श्रीमती सुषमा राठौर ने गाँव के लोगों को चित्रकला से स्वच्छता संवाद के माध्यम से घरों की दीवारों पर शौचालय का उपयोग, शौचालय के उपयोग से स्वास्थ्य पर प्रभाव, कचरा प्रबंधन और हाथ धुलाई के स्लोगन, आकर्षक चित्रों के माध्यम से स्वच्छता के प्रति संदेश देकर लोगों की सोच बदलकर जागरूक कर रही हैं। यह रंग-बिरंगे चित्र ग्रामीणों के मन मस्तिष्क को काफी प्रभावित कर रहे हैं। जिसका परिणाम है कि गाँव की महिलायें घरों में बनाए गए शौचालयों का उपयोग कर रही हैं। 
श्रीमती सुषमा राठौर ने बताया कि समूह की एक महिला को दो ग्राम पंचायतें दी गई हैं। प्रत्येक गाँव में 6 & 4 फीट आकार की 8 पेंटिंग की जाती हैं। प्रति पेंटिंग एक हजार रूपए के मान से 8 हजार रूपए की आय भी हो रही है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से जहाँ ग्रामीण महिलाओं को अपना चित्रकला का हुनर उभारने का मौका मिल रहा है, वहीं हमारी प्राचीन लोक कला जो विलुप्त हो रही है, उसे संरक्षण देने का प्रयास किया गया है। चित्रकला से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल रहा है। 
अभियान के तहत जनपद पंचायत स्तर पर चयनित उत्कृष्ट पेंटिंग को तीन हजार रूपए की राशि, जिले स्तर पर 10 हजार और राज्य स्तर पर चयनित पेंटिंग को 50 हजार रूपए की पुरस्कार राशि प्रदाय किए जाने का प्रावधान है।