लोहामंडी जैन मन्दिर मे चल रहे सिध्दचक्र विधान के अतिंम दिन निकाली रथयात्रा

Nov 12 2019

ग्वालियर। श्री दिगंबर लाला गोकुलचंद जैसवाल जैन मंदिर कमेटी के तत्ववाधान में चले रहे 04 से 12 नवबंर तक नौ दिवासीय श्री 1008 सिध्दचक्र महामंडल विधान एवं विष्व षंान्ति महायज्ञ महोत्सव के अतिंम दिन मंगलवार को विश्वशान्ति महायज्ञ कर भगवान जिनेद्र की विषाल रथयात्रा गाजेबाजे व धूमधाम के साथ निकाली गई। 
रथयात्रा से पूर्व पहले विधानचार्य षषिकांत षास्त्री के मार्ग दर्षन में भगवान जिनेन्द्र का अभिशेक एवं षंान्तिधार सौधर्म इंद्र सहित इंद्रो भक्ति नृत्य कर किया। विधान के अतिंम दिन विष्वषंान्ति महायज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें इंद्र-इन्द्राणियों ने सामूहिक रूप से अग्निकुंड में आहुति डालकर भगवान जिनेन्द्र से विष्वषांन्ति की मनोकामना की।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि महायज्ञ के उपंरात रथयात्रा श्री दिगंबर जैन मन्दिर से षुरू हुई, रथयात्रा में रथ के अन्दर मूल नायक भगवान महावीर की मूर्ति लेकर पवन कुमार दिलीप जैन बैठे एवं रथ के सारथी मुन्नलाल सगुनचंद जैन थे। यह रथयात्रा जैन मदिर लोहा मंडी से प्रारंम होकर मुख्य मार्गो से होती हुई हजीर चैराहे से घूमकर वापस जैन मंदिर पहुची। 
रथ को युवा और पुरुष जयकारो के साथ खीचा, जयघोश बैड ने प्रस्तुति दी
इस रथयात्रा में धार्मिक भजनों की धुन पर सफेद वस्त्र पहने हुए भक्तगण युवा और पुरूश जयकारो के बीच नृत्य करते हुए रथ को खीचा रहे थे। समाज के लोगो ने अपने घर प्रतिश्ठानो के आगे रंगालो सजाकर रथयात्रा का स्वागत व भगवान श्रीजी की पूजा आर्चना कर भव्य आरती उतारी। समयसार विद्या निकेतन के बच्चो ने जयघोश बैड से रथयात्रा में प्रस्तुति दी।
महिलाओ ने डाडिया और नृत्य किया
रथयात्रा के आगे महिलाएं और बच्चे हाथों में जैन घर्मध्वजा लेकर चल रहे थे, उनके पीछे बग्गियो मे इंद्र-इंद्राणिया रत्नों की वर्शा करते हुए चल रहे थे। रथ के आगेे महिलाएं भजन कीर्तन करते तो बालिकाएं डाडिया नृत्य कर रथयात्रा की षोभा बढ़ा रही थी।
धर्म को समझने के लिए संस्कृति ज्ञान होना जरूरी-मुनिश्री
मुनिश्री संस्कार सागर महराज ने कहा कि वैदिक मंत्रों व संस्कृति कर रक्षा के लिए संस्कृत प्रचाीन भाशा है जो धर्म से मानव का जोडती है। संस्कृति की रक्षा करना है तो मानव को संस्कृत का ज्ञान होना जरूरी है। वर्तमान मे संस्कृत भाशा की स्थिति दयनीय है। संस्कृति का थोड-सा ज्ञान होने पर विघार्थी पूजा-पाठ व कर्म कांड से जुड जाते है। षिक्षा अधूरी छोड देती है। अधूरा ज्ञान होने से वे पूरी तरह जानकार नहीं हो पाते है। देव भाशा संस्कृत के संरक्षक के लिए अब सामूहिक प्रयास जरूरी है। विधानचार्य षंषिकांत षास्त्री का श्रीफल व षॉल देकर सम्मान मंदिर कमेटी के अध्यक्ष पदमचंद जैन, मंत्री देवेद्र जैन, नवरंग जैन, दिलीप जैन, डॉ मुकेष जैन राहुल जैन, अभिलाश जैन, रविन्द्र जैन, विमल जैन, मनीश जैन, आलोक जैन ने किया।
भगवान पाश्र्वनाथ का किया अभिशेक, वेदी विजारित की प्रतिमा
यह रथयात्रा वापस कार्यकम स्थल पर पहुॅचने पर जैन समाज के लोगो ने भगवान महावीर स्वामी की पूजा आर्चना कर अभिशेक कर प्रतिमा को वेदी विराजित ंिकया गया।