क्रोध व बैर के शमन के लिए भगवान महावीर ने उपवास और क्षमा शब्द दिया है-मुनिश्री

Nov 10 2019

ग्वालियर। क्रोध उत्तेजक तत्व है। जो मनुष्य को उग्र बनाता है और बैर की नींव डालता है। क्रोध क्षणिक आता है और चला जाता है। किन्तु अपना प्रभाव और भयानक तत्व छोड़ जाता है। जो अनेक जन्मों तक आत्मा पर छाया रहता है। दुश्मनी का पाप जन्मों-जन्मों तक साथ रहता है। क्रोध व बैर के शमन के लिए भगवान महावीर ने उपवास और क्षमा शब्द दिया है। क्रोध के उफान को निरस्त करना उपशम है। क्रोध मानव का मूल स्वभाव नहीं है। मनुष्य मूल प्रकृति शांत भाव से रहने की है। यह बात उपग्वालियर लोहमंडी जैन मदिंर में अयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के आज सातवें दिन रविवार को धर्मसभा में मुनिश्री संस्कार सागर महाराज ने कही। षाम को भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया
मुनिश्री ने कहा कि असत्य हमेशा मरता है। सत्य हमेशा जीवित रहता है। अपमान होने पर हम कितने दुखी होते हैं, इसलिए हम भी किसी को अपमानित नहीं करें। क्रोध के स्थान पर करुणा हो तो दुश्मन भी मित्र बन जाता है। अभिमान हमें झुकने नहीं देता है, अहंकार छोड़े बिना गुरु परमात्मा का भी नहीं हो सकता है। व्यक्ति को बदलने का अवसर मिलना चाहिए। कर्म के भ्रम को कोई ना जानता है। बैर को समाप्त करना चाहिए। कर्म का लेख टलता नहीं है। पाप करें हम दोषी परमात्मा गुरु को नहीं ठहराएं। मनुष्य शांत प्रकृति से अपने क्रोध को समाप्त कर सकता है। हम सदैव दुश्मन को क्षमा करें।
मदिंर समिति ने मुनिश्री लिया आशीर्वाद
प्रवचनो से पहले मुनिश्री के चरणो में मंदिर समिति के अध्यक्ष पदमचंद जैन, महामंत्री देवेद्र जैन, दिलीप जैन, नवरंग जैन, राकेष जैन, अभिलाश जैन, राहुल जैन, मनीश जैन, अमित जैन, अलोक जैन, रवि लाला जैन, राजुल जैन, प्रवक्ता सचिन जैन ने श्रीफल चढ़ाकर आषिर्वाद लिया।
मुनिश्री ने महा मंत्रों से बृहद शांतिधारा कराई, झूमकर आरती उतारी
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रतिश्ठाचार्य पं0 षषिकांत षास्त्री ने के साथ सौधर्म इंद्रा मनीश जैन सहित इंद्रो ने जिनेंद्रदेव के ऊपर जलधार से अभिषेक जयकारों के साथ किया। मुनिश्री ने अपने मुखबिंद से मंत्रो का महा उच्चारण कर बृहद शांतिधारा राजेश कुमार पदमचंद जैन परिवार करने का सौभाग्य मिला। अभिशेक के उपरांत भगवान की महाआरती इंद्रो ने झूमकर सामूहिक रूप से की। 
महोत्सव के सातवें दिन इंद्रा-इंद्राणियो ने मिलकर 516 अघ्र्य किये समर्पित 
इस विधान में इंद्रा-इंद्राणियो ने पीले वस्त्र धारण कर सिर पर मुकुट गले में माला पहनकर भक्ति भाव के साथ पूजा आर्चन कर मैना सुंदरी बबीता पदमचंद जैन ने भक्तिभाव के साथ जिनेन्द्रदेव के समक्ष 516 महाअर्घ समर्पित किए गए।
विधान मे आज अतिंम महाअघ्र्य चढेगे, कल विशाल रथयात्रा निकलेगी
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री के सानिध्य में प्रतिश्ठाचार्य पं0 षषिकांत के मार्ग दर्षन में सिध्दचक्र महामंडल विधान महोत्सव के 11.11.19 को अतिंम दिन 1024 महाअध्र्य समर्पित किए जाऐगे। कल 12 नबंवर को प्रात 7:00 बजे श्रीजी के अभिशेक व पूजन प्रात 10:30 बजे से विष्व षंान्ति महायज्ञ एवं 12 बजे से जैन मंदिर लोहा मंडी से विषाल रथयात्रा गाजे बाजे के साथ प्रारंभ होकर हजीर चैराहे से होती हुई वापस घूमकर जैन मंदिर पहुॅचेगी। यहॉ श्रीजी के अभिशेक होगे।