जीवाजी विश्वविद्यालय,ग्वालियर प्रबंध अध्ययनशाला एम.एस. ऐक्सल वर्कशॉप
Mar 26 2019
जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रबंध विभाग में मैनेजमेन्ट एम.एस. ऐक्सल पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कुलपति मा. प्रो. संगीता शुक्ला का मार्गदर्शन रहा। कार्यशाला का आरम्भ दीप प्रज्जवलन से हुआ। मुख्य अतिथि के रुप में प्रो. अश्विनी श्रीवास्तव ने कहा कि तकनीकी के साथ शोध का सामंजस्य बनाने की आवश्यकता है इसी कारण ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। उन्होनें कहा कि जीवाजी विश्वविद्यालय हमेशा युगानूकुल बने रहने तथा राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने में सहायक रहा है। जीवाजी विश्वविद्यालय ने प्रदेश में हमेशा अग्रिणी भूमिका निभाइर्, इसी ताराम्य कार्यशाला विशेषताओं को जोडकर उन्होने उजगार किया कि जीवाजी विश्वविद्यालय ने कम्पयूटराईजेशन को 1988-1989 में ही लागू कर दिया था। उन्होनें छात्रों को प्रोत्साहित करते हुयें कहा कि फ््लौपी-डिस्क से पेन-ड्राइव का सफर परिवर्तन का दौर रहा तथा इसलियें छात्रों को नई तकनीक एवं टूल्स से अपने कों ससंचित रखना होगा तभी उन्नति सम्भव है। विशिष्ट अतिथि के रुप में प्रो. उमेश होलानी जी ने कहा कि सांख्यकी के नये टूल्स दिन प्रतिदिन बदलते रहते है इस लिये प्रबन्धन के छात्रोे को आवश्यक है कि इनकी विशेषज्ञता हासिल करें जिससे अच्छा रोजगार मिल सके। उन्होनें कहा कि मात्र तकनीक में छात्र न उलझे, परन्तु समाज में जाकर विपणन से लेकर लौकिकता तक प्रबन्धन के हर एक आयाम पर चिन्तन आवश्यक है। कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राजेन्दª खटीक ने कहा कि कि भारतीय युवा अपने मस्तिष्क की तीव्रता को कम्प्यूटर की तुलना में कहीं अधिक गॉठे‘ क्यांेकि कम्प्यूटर को चलाने वाला तो मानव ही है। विभागाध्यक्ष प्रो. सुविज्ञा अवस्थी ने कहा ‘ नेशन फस्ट‘ के पहलू को लेते हुयेें इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है, आज के भारतीय युवा को तकनीक को साथ लेकर चलना होगा तभी समाज और राष्ट्र की उन्नति तथा प्रगति सम्भव है। उन्होनें कहा की एम.एस. ऐक्सल से बहु-विस्तृत डेटा कम समय में विश्लेषित किया जाता है तथा विविध-विश्लेषण सिद्धान्त के द्वारा निष्कर्षों को प्रदर्शित किया जाता है। इस प्रक्रिया को अपनाने में समय कम लेते हुये परिणामों को प्रमाणित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में दो विशेषज्ञों श्री आर. के. काम्बोज एवं श्री राम पालीवाल के द्वारा एम.एस. ऐक्सल के विभिन्न उपयोगो की विधि बताई। श्री कामबोज ने सैलरी-शीट, सेल-पर्चेस, सेैलरी-मैनेज शॉर्टिंग डाटा एण्ड फिल्टर फंक्शन, कन्डिशनल फॉर्मेंिटंग आटो फायलिंग पर प्रैक्टिकल इम्लिमेंटेंशन कर छात्रो को प्रयोगात्मक अभ्यास करवाया।
श्री राम पालीवाल ने लॉजिकल फंक्शन , डेटा शॉर्टिंग से वृहद् डाटा स्व-छटनी हो क्लब कर छात्रों का अभ्यास कराया। उन्होनें बताया कैसे ट्रान्सपोस एवं डाटा फंक्शनस से डाटा तर्क संगत तथा न्याय सगंत विधि से प्रादर्शित हो जाता है। वि-लुकअप एवं एच-लुकअप से डाटा शोध के अनुसार चयनित होता है, कि विधि छात्रों का बताई गई। इस वर्कशॉप के माध्यम से विधार्थी को प्रयोगात्मक उपयोग करना सिखया तथा मैनेजमेन्ट के छात्रों को इससे डाटा को उपयोगी एवं रचनात्मक तरीके से उपयोग करने मे सहायता के प्रारुप से पारंगत कराया। टसववानचए ीसववानचए चपअवज जंइसमए चपअवज बींतजए पएि ेनउपएि बवनदजए उपदए उंग इत्यादि फंक्शन प्रयोगात्मक तरीके से रिपोर्ट तैयार करने में छात्रों को कार्यशाला में प्रेशिक्षित किया गया।
डॉ. स्वर्णा परमार ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यशाला की कोऑर्डिनेटर डॉ. लोतिका सुराना एवं डॉ. प्रेरणा बाबेर रही । संचालन विदुषी, कृति कम्पानी, लवी, आयुषी, ने किया। कार्यक्रम में डॉ. शान्तिदेव सिसौदिया, डॉ. प्रियदर्शिनी नागोरी, डॉ. रश्मिता सिंह, डॉ, रीना शर्मा, निक्की जैन, लिली, शिवानी, संजय निगोतिया, डॉ. भानुप्रताप सिंह तोमर, संजय पाल आादि उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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