कृषि विज्ञान केन्द्र में फसल अवशेष प्रबंधन पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

Nov 02 2026

ग्वालियर। कृषि विज्ञान केन्द्र, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में 2 से 6 नवम्बर तक आयोजित पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम फसल अवशेष प्रबंधन  का शुभारंभ 2 नवम्बर को किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. वाईपी सिंह, निदेशक विस्तार सेवाएँ, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत किया गया। 
इस अवसर डॉ. वाईपी सिंह, निदेशक विस्तार सेवाएँ द्वारा अपने उद्बोधन में फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वर्तमान समय में फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कृषि की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से वायु प्रदूषण बढऩे के साथ-साथ मृदा में उपलब्ध लाभकारी सूक्ष्मजीवों एवं जैविक पदार्थों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों को फसल अवशेषों को जलाने के स्थान पर उनका उपयोग जैविक खाद बनाने, मल्चिंग तथा मिट्टी में मिलाने के लिए करने की सलाह दी।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस पर डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन की उन्नत तकनीकियाँ विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया, जिसमें फसल अवशेषों के प्रभावी प्रबंधन हेतु विभिन्न आधुनिक तकनीकों एवं कृषि यंत्रों के महत्व की जानकारी प्रदान की गई। फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने अथवा विभिन्न कृषि यंत्रों की सहायता से उनका उपयोग करने से मृदा में जैविक कार्बन एवं पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। इससे मृदा की उर्वरता एवं जल धारण क्षमता में सुधार होता है तथा वायु प्रदूषण की समस्या को भी कम किया जा सकता है। अत: किसानों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं उपयोगी प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है।
इसी क्रम में डॉ. राजीव सिंह चौहान द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन रू समय की मांग एवं समाधान विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने फसल अवशेषों को जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों तथा उनके वैकल्पिक उपयोग एवं प्रबंधन के विभिन्न उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उक्त पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 25 प्रशिक्षणार्थियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा पर्यावरण संरक्षण के संबंध में सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जाएगी।