राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए पटेल के आदर्श अपनाने की जरूरत: प्रो. राजपूत

Oct 31 2026

ग्वालियर। सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को समर्पित किया। उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और नेतृत्व क्षमता से देश की रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जीवन मूल्य आज भी प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत हैं। हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। यह बात जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने शनिवार को राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित भाषण प्रतियोगिता की अध्यक्षता करते हुए कही।
जीवाजी विश्वविद्यालय की प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला तथा नोडल केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा के संयुक्त तत्वावधान में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्य वक्ता महारानी लक्ष्मीबाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय (एमएलबी) के राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध अध्ययन विभाग के प्राध्यापक प्रो. नीरज कुमार झा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष प्रो. हेमंत शर्मा एवं नोडल भारतीय ज्ञान परंपरा प्रो. शांतिदेव सिसोदिया उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता प्रो. नीरज कुमार झा ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का व्यक्तित्व दृढ़ संकल्प, राष्ट्रभक्ति और प्रशासनिक कुशलता का प्रतीक था। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनसामान्य को संगठित कर राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया। आजादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न रियासतों को एकजुट कर एक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की थी। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए पटेल ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ, कूटनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति से भारत के एकीकरण का ऐतिहासिक कार्य किया। उनका जीवन और कृतित्व नई पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और नेतृत्व की प्रेरणा देता है। आयोजन सचिव एवं विभागाध्यक्ष प्रो. शान्तिदेव सिसोदिया ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में राष्ट्रबोध, सामाजिक एकता और सामूहिक उत्तरदायित्व को विशेष महत्व दिया गया है। सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन इन मूल्यों का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता केवल भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों के आपसी विश्वास, सहयोग, सांस्कृतिक चेतना और साझा संकल्प से मजबूत होती है। युवाओं को महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान कुलगुरु प्रो. राजपूत ने उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने की शपथ भी दिलाई। इसके बाद आयोजित भाषण प्रतियोगिता में अध्ययनशाला के विद्यार्थी राज सिंह, सौरभ गुर्जर, हर्ष गुर्जर, अभिषेक दुबे और अंकित राठौर ने सरदार वल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा राष्ट्रीय एकता में उनके योगदान पर विचार रखे। प्रतियोगिता के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन श्वेता सिंह एवं अंकित राठौर ने किया। इस अवसर पर वैभव शर्मा, वैशाली गुर्जर, राहुल कुमार, प्रिया सुमन, आकाश शर्मा, तमन्ना शर्मा, आकांक्षा सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।