स्वदेशी मेला में हुआ झांसी की रानी महानाट्य का मंचन

Oct 27 2026

ग्वालियर। रणभेरी बजते ही तोपें गरज उठीं, तलवारें चमक उठीं। दर्शकों को ऐसे लगे मानो वे सचमुच स्वदेशी मेला प्रागंण में युद्ध शुरू हो गया। यह नजारा स्वदेशी मेला में वंदेमातरम समूह द्वारा स्वदेशी, स्वाबलंबन एवं स्वाभिमान पर आधारित महानाट्य झांसी की रानी लक्ष्मीबाई मंचन के दौरान देखने को मिला। रंगबिरंगी आतिशबाजी से वीरांगना मेला प्रागंण नहा उठा। देश के अनेक वीरों की शहादत को नमन करने के लिए ध्वनि एवं प्रकाश् पर आधारित प्रस्तुत किया गया भव्य नाट्य मंचन दर्शकों में कौतुहल पैदा कर गया। 60 मिनट में 80 दृश्यों में 100 कलाकारों ने 350 साला का इतिहास दिखा दिया। झांसी की रानी एवं गंगाधरराव के विवाह का दृश्य नाटक में सबसे खुशनुमा और उल्लासित करने वाला था। कलाकारों ने जब राजस्थानी लोकनृत्य की सामुहिक प्रस्तुति दी, तो सारा वातावरण प्रफुल्लित हो उठा। एक घंटे की इस नाट्य प्रस्तुति में 4 वर्ष से लेकर 65 वर्ष तक के कलाकारों ने भागीदारी की।
उधम बुंदेला की बगावत की बगावत दिखाई
महानाट्य में उधम सिंह बुंदेला की बगावत को प्रमुखता से दिखाया गया, जिसमें वह अपनी बुदेली भाषा में हमें न तंग करो काहे पन्हैया सी देत हो..के माध्यम से निर्देशक लोकल टच देने में सफल रहे। अंत में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए रानी वीरगति को प्राप्त हुई और लोगों की आंखें नम हो गईं। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य यशवंत इंदापुरकर, कार्यवाह विजय दीक्षित, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जादौन मौजूद रहे।