मरीजों के दर्द को समझना और मुश्किल वक्त में उनका सहारा बनना ही सच्ची मानव सेवा—अरुणेश भदौरिया
Oct 25 2026
ग्वालियर। बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति के लिए दवाइयों और उपचार के साथ-साथ अपनों का साथ, दो शब्द सहानुभूति के और मुश्किल समय में किसी का सहारा मिलना भी बहुत मायने रखता है। इसी मानवीय संवेदना और सेवा भावना के साथ जनशक्ति वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजसेवी अरुणेश सिंह भदौरिया ने सिम्स मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुँचकर भर्ती मरीजों का हालचाल जाना और उनके परिजनों से आत्मीय मुलाकात की।
अस्पताल में भदौरिया ने मरीजों के पास पहुँचकर उनसे बातचीत की, उनकी परेशानियों को सुना और परिजनों का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा कि बीमारी का समय केवल मरीज के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से कठिन होता है। ऐसे समय में किसी का हाल पूछना, उसकी पीड़ा को समझना और उसे यह विश्वास दिलाना कि वह अकेला नहीं है, मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। सच्ची समाजसेवा बड़े मंचों से भाषण देने या प्रचार करने में नहीं, बल्कि अस्पताल के बिस्तर पर पड़े किसी पीडि़त का हाथ थामने, उसकी तकलीफ सुनने और उसके चेहरे पर उम्मीद की मुस्कान लाने में है। सेवा का वास्तविक अर्थ दूसरों के दुख को अपना समझना है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे अनेक परिवार हैं जो बीमारी के दौरान आर्थिक कठिनाइयों के साथ मानसिक तनाव से भी गुजरते हैं। ऐसे परिवारों को केवल सहायता ही नहीं, बल्कि संवेदनशील व्यवहार, अपनापन और भरोसे की भी जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा के लिए किसी बड़े पद, प्रतिष्ठा या विशेष अवसर की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत होती है तो केवल संवेदनशील हृदय और दूसरों की पीड़ा समझने की भावना की।
इस सेवा एवं मुलाकात कार्यक्रम के दौरान जनशक्ति वेलफेयर सोसायटी की पदाधिकारी अंजू भदौरिया, रानू शर्मा, वर्षा सहित संस्था के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा उन्हें हिम्मत और सकारात्मक सोच बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया। भदौरिया ने कहा कि समाज की वास्तविक ताकत आपसी सहयोग, संवेदना और मानवता में छिपी है। जब समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति किसी जरूरतमंद की सहायता के लिए आगे आता है, तभी एक संवेदनशील और मजबूत समाज का निर्माण होता है।
उन्होंने कहा, ‘किसी दुखी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लौटाना, निराश व्यक्ति के मन में उम्मीद जगाना और संकट के समय किसी परिवार के साथ खड़े होना ही सच्ची सेवा है। मानवता से बढक़र कोई धर्म नहीं और पीडि़त की सेवा से बढक़र कोई पुण्य नहीं। जनशक्ति वेलफेयर सोसायटी ने जरूरतमंदों की सहायता, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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