सनातन धर्म मंदिर में श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ

Oct 22 2026

ग्वालियर। महिला भक्त मंडल के तत्वावधान में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन होगा। सुबह 11 बजे श्रीराम मंदिर से प्रारंभ हुई कलश यात्रा पाटनकर बाजार, ऊंट पुल, हाईकोर्ट स्थित गिरिराज धरण मंदिर, घोड़ा चौक तथा जयेन्द्रगंज चौराहे से होते हुए सनातन धर्म मंदिर पहुंची। यात्रा में श्रद्धालुओं ने उत्साह और भक्तिभाव के साथ सहभागिता की। भगवान श्रीराम के जयकारों से वातावरण राममय हो गया। कथा स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलशों की स्थापना की गई और विधि-विधान से पूजन कर कथा का शुभारंभ किया गया।
कथा के प्रथम दिवस संत श्यामसुंदर दास महाराज के सान्निध्य में मंगलाचरण के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। महाराज ने राम कथा के महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा‘राम कथा मंदाकिनी, चित्रकूट चित चारु। तुलसी सुभग सनेह वन, सिय रघुबीर बिहारु।’ उन्होंने कहा कि कलियुग में केवल राम नाम ही कल्याण का एकमात्र साधन है। जहाँ-जहाँ राम कथा होती है, वहाँ भगवान शिव और हनुमान जी स्वयं अदृश्य रूप में विराजमान होकर कथा श्रवण करते हैं। राम कथा सुनने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं, घर में सुख-शांति आती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। राम कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती है।
शिव-पार्वती विवाह का दिव्य प्रसंग सुनाते हुए महाराज ने कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव की बारात हिमाचल नगरी पहुंची। शिव की विचित्र बारात में भूत-प्रेत, पिशाच, नंदी, गण-गंधर्व शामिल थे, जिसे देखकर हिमाचल नगरी की महिलाएं भयभीत हो गईं। बाद में भगवान विष्णु के कहने पर शिव जी ने सुंदर स्वरूप धारण किया और राजा हिमाचल की पुत्री पार्वती के साथ उनका पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न हुआ। इस प्रसंग के दौरान पंडाल में ‘बधाई हो बधाई, शिव ब्याहन आए’ जैसे बधाई गीतों पर महिलाएं नाच उठीं। अंत में महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान श्रीमती सरस्वती एवं विनोद बांदिल हैं।