जैव प्रौद्योगिकी में शोध के नए अवसर तलाशेंगे जेसू-बुंदेलखंड विवि
Oct 19 2026
ग्वालियर। जीवन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी मिलकर शैक्षणिक गतिविधियों को विस्तार देंगे। इसी उद्देश्य से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में ‘ब्रिजिंग माइंड्स इन लाइफ साइंसेज’ विषय पर अंतर-विश्वविद्यालयीय छात्र संवाद एवं पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें दोनों विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने आधुनिक शोध तकनीकों, वैज्ञानिक नवाचार, अंतर्विषयी अनुसंधान और रोजगार की संभावनाओं पर विचार साझा किए। साथ ही संयुक्त शोध परियोजनाओं, विशेषज्ञ व्याख्यानों, कार्यशालाओं और विद्यार्थी आदान-प्रदान जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में जीवाजी विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष प्रो. समीर भाग्यवंत सहित शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. ऋषि सक्सेना, डॉ. लवकुश, डॉ. सुमिरन, डॉ. पंकज, डॉ. रंजना और डॉ. निधि सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।
प्रयोगशालाओं में देखीं शोध की संभावनाएं
संवाद के दौरान जीवाजी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं और अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्हें जीवन विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों और शोध कार्यों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने आधुनिक शोध प्रक्रियाओं को समझने के साथ वैज्ञानिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग के बारे में भी जाना।
शोध से सामाजिक समस्याओं के समाधान पर जोर
पैनल चर्चा में जीवन विज्ञान के उभरते क्षेत्रों, अंतर्विषयी अनुसंधान और वैज्ञानिक नवाचार के साथ विद्यार्थियों के लिए शोध एवं रोजगार के अवसरों पर मंथन हुआ। शिक्षकों ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोधपरक सोच के माध्यम से नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। विद्यार्थियों को विज्ञान एवं तकनीक का उपयोग सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए करने और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया गया।
जीवाजी विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष प्रो. समीर भाग्यवंत ने इस पहल को दोनों विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक सहयोग मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में संयुक्त शोध परियोजनाओं, विशेषज्ञ व्याख्यानों, कार्यशालाओं और विद्यार्थी आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस पहल से दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने, नई शोध तकनीकों से परिचित होने और जीवन विज्ञान के क्षेत्र में अपनी क्षमताएं विकसित करने के अवसर मिलने की उम्मीद है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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