एआई से परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र बनाना व्यावहारिक नहीं, विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ की आशंका : भदौरिया

Oct 14 2026

ग्वालियर। एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर ‘एआई से परीक्षा के दिन बनें पर्चे, देशभर में हों सीबीटी : नीलेकणी’ के बाद औद्योगिक एवं प्रबंधन क्षेत्र में 31 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले, वर्तमान में असिस्टेंट जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत समाजसेवी एवं जनशक्ति वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष अरुणेश सिंह भदौरिया ने इस सुझाव पर असहमति व्यक्त की है।
भदौरिया ने कहा कि पेपर लीक रोकना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इसके लिए परीक्षा के दिन अथवा एक दिन पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से प्रश्नपत्र तैयार करना व्यावहारिक चुनौतियाँ पैदा कर सकता है। परीक्षा केवल प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत और भविष्य से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एआई द्वारा तैयार प्रश्नपत्र में तथ्यात्मक त्रुटियाँ हों, पाठ्यक्रम से बाहर प्रश्न आ जाएँ अथवा कठिनाई का स्तर असंतुलित हो, तो जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या इतने कम समय में विषय विशेषज्ञ प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित कर पाएँगे?
भदौरिया ने कहा कि पेपर लीक मूलत: गोपनीयता, सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ी समस्या है। केवल तकनीक बदलने से इसका स्थायी समाधान संभव नहीं है। एआई का उपयोग प्रश्न बैंक तैयार करने, त्रुटियाँ पहचानने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में अवश्य होना चाहिए, लेकिन अंतिम स्वीकृति अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा ही दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के विस्तार से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं और सभी विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देना आवश्यक है। अंत में भदौरिया ने कहा,  ‘शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन सुधार के नाम पर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ प्रयोग नहीं होना चाहिए। तकनीक हमारी सहायक होनी चाहिए, मानवीय विशेषज्ञता और जवाबदेही का विकल्प नहीं।‘