वन केवल भौतिक नहीं, मनोवैज्ञानिक संपदा - डीएफओ अवधेश मीना

Sep 30 2026

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय स्तरीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) नेतृत्व एवं प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन विचारों और सामाजिक सरोकारों का संगम देखने को मिला। प्रभात फेरी, योग-पीटी और परिसर में मानव श्रृंखला बनाकर चलाए गए सघन स्वच्छता अभियान के बाद मंच सजा बौद्धिक विमर्श का। इस सत्र ने परंपरागत सोच से इतर प्रकृति और मानवीय चेतना के गहरे संबंधों को उजागर किया। शिविर संचालक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना जीवाजी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना के निर्देशन में कार्यक्रम का कुशल व प्रभावी मंच संचालन डॉ. हिन्दू सिंह धाकड़ जी द्वारा किया गया। 
सत्र के मुख्य वक्ता ग्वालियर वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) अवधेश कुमार मीना ने कहा कि वनों को केवल राजस्व, काष्ठ या भौतिक संपदा (मॉनेटरी प्रॉपर्टी) तक सीमित मान लेना प्रकृति के साथ अन्याय है। वास्तव में वन एक अमूल्य ‘मनोवैज्ञानिक संपदा’ हैं। हरियाली और प्राकृतिक परिवेश मानवीय अवचेतन को शांत कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं तथा मानसिक संतुलन को सुदृढ़ बनाते हैं। आज की तनावपूर्ण दिनचर्या में वनों की यह मनोवैज्ञानिक भूमिका किसी वरदान से कम नहीं है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा ने प्रशासनिक दक्षता और विद्यार्थी हित के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने रेखांकित किया कि एनएसएस केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के संस्कार गढऩे की जीवंत कार्यशाला है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रविकांत द्विवेदी ने भारतीय दर्शन में व्यक्तित्व विकास विषय पर पंचकोश सिद्धांत के माध्यम से आत्म-परिष्कार और संप्रेषण कौशल के सूत्र दिए। वहीं केआरजी कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. वासुदेव सिंह जादौन ने युवा और सोशल मीडिया विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने आगाह किया कि डिजिटल दुनिया में युवा केवल उपभोक्ता न बनें, बल्कि तकनीक का विवेकपूर्ण इस्तेमाल कर उसे राष्ट्र निर्माण का सशक्त जरिया बनाएं। अनुशासन, विचार और पर्यावरण चेतना के इस अनूठे समन्वय के साथ शिविर का तृतीय दिवस प्रेरणादायी संदेश देकर संपन्न हुआ।
सत्र के दौरान अतिथियों का पटका, बैज़ एवं श्रीफल देकर प्रो हीरालाल पटेल, डॉ. विनोद कुशवाह, डॉ नरेंद्र कुमार वर्मा द्वारा स्वागत किया गया। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. विनोद कुशवाह जी ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।