पीडि़त की जाति बताने से क्या उसका दर्द कम या ज़्यादा हो जाता है?—अरुणेश भदौरिया
Sep 27 2026
ग्वालियर। समाज में बढ़ते जातिगत विभाजन को लेकर समाजसेवी एवं जनशक्ति वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष अरुणेश सिंह भदौरिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय होने पर उसकी जाति को प्रमुखता देने के बजाय अन्याय और न्याय की बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मुझे बहुत दु:ख होता है जब किसी घटना पर यह कहा जाता है कि फलाँ समाज के व्यक्ति के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। यही बात इस तरह भी कही जा सकती है कि एक व्यक्ति के साथ बहुत गलत हुआ है और उसे न्याय मिलना चाहिए।
भदौरिया ने कहा कि पीडि़त की जाति बताने से उसका दर्द न कम होता है, न ज़्यादा। अन्याय किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय के व्यक्ति के साथ हो, उसके लिए समान रूप से आवाज उठनी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों से अपील की कि हर घटना को जातिगत पहचान से जोडऩे के बजाय मुद्दे और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखें। बार-बार जाति को केंद्र में रखकर घटनाओं को प्रस्तुत करने से समाज में जातिगत विभाजन बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य ऐसा समाज बनाना होना चाहिए जहाँ व्यक्ति की पहचान से पहले उसकी इंसानियत देखी जाए और न्याय का आधार उसकी जाति नहीं, बल्कि उसके साथ हुआ सही या गलत व्यवहार हो।
‘जाति देखकर आवाज मत उठाइए, अन्याय देखकर आवाज उठाइए। न्याय सबके लिए हो और भेदभाव किसी के साथ नहीं। ‘
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









