गौसेवा के माध्यम से गौ लोकवासी दिवंगत पूर्वजों का किया स्मरण

Sep 27 2026

ग्वालियर। पूर्णिमा श्राद्ध के पावन अवसर पर श्रीकृष्णायन आदर्श गौशाला लाल टिपारा में गुजरात से आए श्रद्धालुओं ने गौसेवा एवं गौपूजन के माध्यम से गौ लोकवासी दिवंगत पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। राजकोट से पधारे पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री वल्लभभाई कथारिया की धर्मपत्नी श्रीमती कांता बेन कथारिया सहित श्रद्धालुओं ने गौमाता के दर्शन-पूजन किए तथा सेवा कार्यों में सहभागिता की।
इस अवसर पर संत ऋषभ देवानंद महाराज ने कहा कि श्राद्ध श्रद्धा के साथ पूर्वजों के प्रति सम्मान, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने की भारतीय परंपरा है। तर्पण, स्मरण और सेवा जैसे माध्यम व्यक्ति को अपने परिवार, समाज और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान-परंपराओं से जोड़ते हुए उनके सामाजिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पक्ष को समझना आवश्यक है। पूर्वजों का स्मरण केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर परिवार, समाज, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, करुणा एवं कृतज्ञता जैसे जीवन-मूल्यों को समझने का अवसर बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और जीवों की सेवा के माध्यम से पूर्वजों का स्मरण श्रद्धा को सेवा, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ता है। जब श्रेष्ठ कार्यों को संस्कृति और परंपराओं से जोड़ा जाता है, तो उनमें केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं रहती, बल्कि वे समाज में संवेदनशीलता, सेवा और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩे के साथ समाज, प्रकृति और समस्त जीव-जगत के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनाने में सहायक हो सकती हैं।