सूरज की लालिमा के साथ पुरखों को पानी देना शुरू

Sep 26 2026

ग्वालियर। सूरज की किरण निकलने के साथ ही लोगों ने तालाबों पर पहुंचकर पितरों को पानी दिया। पितरों को पानी देने कटोराताल के छोटे कुण्ड में रात को ही पानी भर दिया गया था। जिसके चलते सुबह से लोगों का वहां पर पहुंचकर पानी देने का सिलसिला बना रहा। वहीं पानी देने के दौरान होने वाले मंत्रोच्चारण एवं पूजा-पाठ के लिए पंडि़त भी वहां पर मौजूद थे, जिन्होंने पानी देने आए लोगों को पूजन कराया।
शनिवार सुबह श्राद्धपक्ष के पहले दिन पितरों की आत्मशांति के लिए जलाशयों पर दाब हाथ में लेकर पानी के बीचों-बीच पितरों की शांति के लिए तर्पण किया। श्राद्ध पक्ष के दौरान चोर से शुभ कार्यों पर रोक लग गई हैं और बाजारों में नई वस्तुओं की खरीदारी नहीं होगी। श्राद्ध पक्ष के दौरान आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान, पूजा कर ब्राह्मणों को भोजन कराया जा रहा है।
शहर के विभिन्न तालों पर शनिवार सुबह 6 बजे से तर्पण करने वाले पहुंचना शुरू हो गए और अपने पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए विधि विधान के साथ तर्पण किया। ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचन्द्र जैन ने बताया कि जिन जातकों की जन्म पत्रिका में पितृ दोष है वह इस दोष का निवारण पितरों की आत्मशांति के लिए कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान अपने पितरों को याद करने के साथ ही उनके निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध आदि कर आस्था प्रकट करना चाहिए। उन्होंने बताया कि श्राद्ध में काले तिल, जौ और दाब से सूर्य को अघ्र्य देकर तर्पण करने का विधान है। जिस तिथि में पूर्वज गए हैं उसी तिथि में गरीबों, ब्राह्मणों को भोजन कराएं और वस्त्र दान करें जिससे परिवार में खुशहाली रहेगी और पितरों का आशीर्वाद मिलेगा। 
पितरों को भोजन कराने कौवों को खोज रहे लोग
श्राद्ध पक्ष शुरू होते ही ब्राह्मणों के साथ कौवों की पूछ-परख होने लगी है। लोगों के घरों में बने व्यंजनों को पितरों तक पहुंचाने के लिए कौवों को खोजा जा रहा है। चूंकि कौवे विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके हैं, इसके चलते कौवे नहीं मिल रहे हैं, श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों की आत्मशांति के लिए घरों में व्यंजन बनाए जा रहे हैं और विधि विधान के साथ पितरों को खुश करने के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान, पुण्य किया जा रहा है। इसके अलावा गायों और श्वान को भोजन करा रहे हैं।