हेड, हार्ट और हैंड में संतुलन से बनेगी स्वस्थ जीवनशैली

Sep 20 2026

ग्वालियर। शासकीय कमलाराजा कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय (केआरजी) के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग की ओर से एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का विषय ‘आधुनिक युग में स्वास्थ्य, वेलनेस और शारीरिक शिक्षा व खेल की अनिवार्य आवश्यकताएं’ रहा। कार्यशाला में मुख्य अतिथि डॉ. अनिल करवंडे, अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. साधना श्रीवास्तव ने की। मुख्य वक्ता डॉ. संगीता श्रीवास्तव, कॉर्डिनेटर नेट एंड जेआरएफ गुरुकुल रहीं। विशिष्ट अतिथि पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रणवीर सिंह रुहल एवं जीवाजी विश्वविद्यालय के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. केशव सिंह गुर्जर रहे। आयोजन सचिव क्रीड़ा अधिकारी मनोहर कटारिया थे।
डॉ. अनिल करवंडे ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में स्वस्थ रहने के लिए खेल और शारीरिक सक्रियता बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के लिए सही तरीके से सांस लेने की ब्रीदिंग तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नियमित शारीरिक गतिविधियों और खेलों को जीवन का हिस्सा बनाकर कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है। डॉ. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य का संतुलन बनाए रखने के लिए हेड, हार्ट और हैंड के बीच समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सही लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है। खान-पान, दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाकर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। डॉ. केशव सिंह गुर्जर ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए मेहनत जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से खेलों में भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि खेलों से टीम भावना, अनुशासन और सहयोग की भावना विकसित होती है। रणवीर सिंह रुहल ने कहा कि खेल केवल शारीरिक क्षमता बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलों के लिए भी समय निकालने की बात कही। प्राचार्य डॉ. साधना श्रीवास्तव ने कहा कि खेल विद्यार्थियों को स्पोर्ट्समैनशिप की भावना सिखाते हैं।  आयोजन सचिव एवं क्रीड़ा अधिकारी मनोहर कटारिया ने कहा कि बदलती जीवनशैली के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, शारीरिक सक्रियता तथा मानसिक एवं शारीरिक संतुलन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेल उन्हें सक्रिय रखने के साथ अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने में भी मदद करते हैं। कार्यशाला का संचालन डॉ. कृष्णा सिंह ने किया। कार्यक्रम में क्रीड़ा अधिकारी डॉ. नरेश मेहता, डॉ. एके सक्सेना, डॉ. केके तिवारी, डॉ. लखविंदर सिंह, डॉ. केएस गिल, त्रिलोक सिंह चाहर, मनोज राणा, डॉ. रवि दीक्षित, ग्रेस सिंह, डॉ. राजेंद्र सिंह सिकरवार, डॉ. प्रमोद नरवरिया, डॉ. गरिमा कागवानी, डॉ. दिवाकर पाल, डॉ. अनुराग पथक, डॉ. नीरज गुर्जर सहित 300 छात्राएं उपस्थित रहीं।
विद्यार्थियों ने समझा स्वस्थ जीवनशैली का महत्व
आयोजन सचिव मनोहर कटारिया ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के साथ शारीरिक शिक्षा एवं खेलों के महत्व को समझाना था।