AI के दौर में अतीत तलाशता आज का इंसान
Sep 11 2026
आज का युवा 80 के दशक को खोज रहा है। जेनरेशन-ज़ेड का एक वर्ग अतीत में लौटना चाहता है, क्योंकि वह भीड़ से दूर आत्मिक प्रेम, शांति और मानवीय संवेदनाओं को महसूस करना चाहता है।
हैरत की बात यह है कि 80 के दशक में जन्मे कई लोग भी अपने आपको उसी दौर में लौटाने का प्रयास कर रहे हैं। यानी लोग वर्तमान में नहीं, बल्कि अतीत में स्वयं को खोज रहे हैं।
यह बात केवल भविष्य में भूतकाल को खोजने तक सीमित नहीं है। जैसे-जैसे तकनीक विकसित हो रही है, वैसे-वैसे हमारे दिमाग और कल्पनाओं के विस्तार के साथ बहुत कुछ संभव होता जा रहा है। आज जो असंभव लगता है, हो सकता है कल वह सामान्य बात बन जाए।
कुछ समय पहले फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर तस्वीरों को अलग-अलग कैप्शन में बदलने जैसी सुविधाएं दिखाई देती थीं। तकनीक विकसित हुई और आज उसी दिशा में AI हमारे सामने अनेक सुविधाएं लेकर आ चुका है। आने वाले समय में इसकी संभावनाएं और भी बढ़ने वाली हैं।
हम सभी जानते हैं कि मोबाइल और इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग, विशेष रूप से वीडियो और फोटो जैसे डिजिटल कंटेंट का लगातार आदान-प्रदान, पर्यावरण पर भी प्रभाव डालता है। दुनिया में हर पल मोबाइल और इंटरनेट की उपयोगिता बढ़ रही है और AI के आने के बाद डिजिटल कंटेंट का निर्माण भी तेजी से बढ़ा है।
हमारा डिजिटल डेटा कहीं न कहीं क्लाउड सर्वरों पर सुरक्षित रखा जाता है। इस विशाल डेटा को संभालने के लिए बड़े स्तर पर डेटा सेंटर और सर्वर सिस्टम काम करते हैं। इन सर्वरों को लगातार सक्रिय रखने और गर्म होने से बचाने के लिए शीतलन व्यवस्था की आवश्यकता होती है। कई डेटा सेंटरों में इसके लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा और पानी का उपयोग होता है। इस पूरी प्रक्रिया का पर्यावरण पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या हमें AI का उपयोग कम से कम करना चाहिए? शायद ऐसा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा, क्योंकि आधुनिक दौर में AI धीरे-धीरे हमारे कामकाज और जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है। आने वाले समय में लोग इससे और अधिक जुड़ेंगे, नई चीजें सीखेंगे और कई कामों के लिए इस पर निर्भर भी होंगे।
हमारा भविष्य हमारे हाथों में है। हम आधुनिक तो हो रहे हैं, लेकिन प्रकृति के प्रति उतना ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, जितना देना चाहिए। तकनीक का विकास आवश्यक है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं।
AI आधुनिक दौर में हमारा सहायक हो सकता है, लेकिन पूरी तरह उस पर निर्भर रहना उचित नहीं है। हमें अपने मूल कौशल—जैसे एडिटिंग, कोडिंग और अन्य रचनात्मक एवं तकनीकी कार्य—स्वयं सीखते रहना चाहिए।
इससे भविष्य में जब रोबोटिक्स, कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और AI से विकसित नई-नई तकनीकें हमारे सामने आएंगी, तो उन्हें समझने और उनके साथ काम करने में हमें आसानी होगी।
तकनीक हमारे भविष्य को बदल सकती है, लेकिन भविष्य कैसा होगा, यह तय करने की जिम्मेदारी अभी भी हमारे हाथों में है।
आशी प्रतिभा✍️
मध्य प्रदेश, ग्वालियर
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
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