आईसीआईसीआईप्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने लॉन्च किया ‘आईसीआईसीआई लाइफ पार्टनर स्टैक 2.0’
Sep 08 2026
ग्वालियर। आईसीआईसीआईप्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने 2026 में अपने पार्टनर स्टैक में नई क्षमताएँ जोडक़र इसका उन्नयन किया है, जिसे ‘आईसीआईसीआईलाइफ पार्टनर स्टैक 2.0’ का नाम दिया गया है। इस स्टैक से एआई-आधारित टूल, भागीदार-प्रणाली के साथ बेहतर जुड़ाव और डिजिटल क्षमताओं के ज़रिये बिक्री, ऑनबोर्डिंग और ग्राहक सेवा के संबंध में कंपनी के परामर्शकों (एडवाइज़र) और वितरण नेटवर्क को सहायता मिलती है। कंपनी इस उन्नयन के ज़रिये ग्राहकों की यात्रा आसान बनाना चाहती है। परामर्शक और वितरण भागीदारइसके माध्यम से उचित समाधान ढूँढ सकते हैं, कोटेशन तैयार कर सकते हैं, ग्राहक को शामिल (ऑनबोर्ड) कर सकते हैं और उन्हें डिजिटल तरीके से सेवा प्रदान कर सकते हैं। ईकोट ऐप, एआई आधारित प्रोडक्ट रेकमेंडर के ज़रिए ग्राहक के खंड और जीवन के चरण के आधार पर उपयुक्त उत्पाद सुझाता है। साथ ही, यह एडवाइज़र को अपनी ज़रूरत के अनुरूप कोटेशन बनाने और साझा करने की सुविधा भी देता है। लिवा, एक एआई-आधारित चैटबॉट है,जिससे संवाद में मदद मिलती है। इससे एडवाइज़र के लिए ग्राहकों से बातचीत करते समय उत्पाद की विशेषताओं और कोटेशन हासिल करना आसान हो जाता है।
आईसीआईसीआईप्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य वितरण अधिकारी, अमिश बैंकर ने आईसीआईसीआईलाइफ पार्टनर स्टैक 2.0 पर अपनी टिप्पणी में कहा, ‘हमारे एडवाइज़र और वितरण भागीदार ग्राहक को जीवन बीमा समाधान समझने और बीमा लेने में उल्लेखनीय सहायता प्रदान करते हैं। आईसीआईसीआईलाइफ पार्टनर स्टैक 2.0 उन्हें डिजिटल और एआई-आधारित टूल प्रदान करता है, जिससे रोज़मर्रा के काम आसान होते हैं और ग्राहकों के लिए आसानी होती है।
पार्टनर स्टैक 2.0, भागीदार प्रणाली के साथ बेहतर इंटीग्रेशन की सुविधा भी प्रदान करता है। भागीदार सीआरएमप्लेटफॉर्म के साथ इसके जुड़ाव (इंटीग्रेशन) से बेहतर ताल-मेल और ग्राहक के सफर को प्रबंधित करने में मदद मिलती है। नए बनाए गए रिटेल और ग्रुप भागीदार पोर्टल से भागीदार को ग्राहक की जानकारी, रिपोर्ट, भुगतान की जानकारी और अन्य सेवाओं तक पहुँच मिलती है। ऑनबोर्डिंग आसान बनाने के लिए, पार्टनर स्टैक को कई राष्ट्रीय डेटाबेस के साथ जोड़ा गया है, जिनमें आधार के लिए यूआईडीएआई, सीकेवाईसी के लिए सीईआरएसएआई, आईडीवी के लिए वाहन, जीएसटीएन, ईपीएफओ, सीएएस और पर्फियोस शामिल हैं। इन इंटीग्रेशन से आवेदन (एप्लीकेशन) फॉर्म का 70' हिस्सा पहले से भरा जा सकता है, जिससे केवाईसीऔर आय से जुड़े दस्तावेज इक_ा करने और अपलोड करने की ज़रूरत कम हो जाती है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
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