आने वाले चुनाव में पार्टी नहीं, प्रत्याशी देखिए : अरुणेश सिंह भदौरिया

Sep 08 2026

ग्वालियर। जनशक्ति वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष अरुणेश सिंह भदौरिया ने नागरिकों से अपील की है कि आने वाले चुनाव में जाति और पार्टी के नाम पर वोट देने के बजाय प्रत्याशी के चरित्र, ईमानदारी, योग्यता और उसके पिछले कार्यों को देखकर मतदान करें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब मतदाता किसी दल या जाति का स्थायी वोट बैंक बनने के बजाय अपने विवेक से सही जनप्रतिनिधि चुनेगा। भदौरिया ने कहा कि देश सडक़, शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष सहित अनेक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में गरीब और आम परिवार आज भी आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। प्रत्येक नागरिक को कभी अपने परिवार के साथ और कभी अकेले बैठकर यह जरूर सोचना चाहिए कि जब देश लगातार प्रगति कर रहा है, तो उसके परिवार की आर्थिक स्थिति उसी गति से क्यों नहीं बदल रही?
उन्होंने कहा कि जनता को यह सवाल भी पूछना चाहिए कि राजनीति में आने से पहले साधारण आर्थिक स्थिति में रहने वाले कुछ जनप्रतिनिधियों की संपत्ति राजनीति में आने के बाद इतनी तेजी से कैसे बढ़ गई। लोकतंत्र में जनता को अपने प्रतिनिधियों से उनके काम और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता का हिसाब मांगने का पूरा अधिकार है। भदौरिया ने कहा कि गरीब को गरीबी से बाहर निकालने के बजाय उसे जातियों में बाँटकर वोट बैंक बनाने की राजनीति पर गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों को अवसर दिलाने के लिए संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत किया, लेकिन जाति और आरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों का इस्तेमाल केवल चुनावी लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दशकों की राजनीति के बाद भी गरीब को बार-बार अपनी जाति के आधार पर वोट देने के लिए प्रेरित किया जाता है, तो उसकी गरीबी दूर करने, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने, युवाओं को रोजगार दिलाने और परिवार को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?
भदौरिया ने कहा,‘जब तक हमारा वोट जाति, डर, लालच और भावनाओं में बँटता रहेगा और गुंडे, अपराधी तथा भ्रष्ट लोग सत्ता तक पहुँचते रहेंगे, तब तक चुनाव होते रहेंगे, सरकारें बदलती रहेंगी, लेकिन गरीब की स्थिति नहीं बदलेगी।‘ भदौरिया ने मतदाताओं से कहा कि वे अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करें और प्रत्याशी से पूछें कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सडक़, पानी, स्वच्छता और क्षेत्र के विकास के लिए उसकी स्पष्ट योजना क्या है।उन्होंने कहा,‘गरीबी की जंजीर तोडऩे की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकत आपका वोट है। जाति नहीं—चरित्र देखिए, पार्टी नहीं—प्रत्याशी देखिए, वादे नहीं—पिछला काम देखिए और फिर अपने विवेक से वोट दीजिए। वोट बैंक मत बनिए, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनिए। देश तभी बदलेगा, जब वोट देने का आधार बदलेगा।