अनंगपाल सिंह अनंग की 11 पुस्तकों का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह संपन्न

Sep 05 2026

ग्वालियर। जन्माष्टमी के पावन पर्व के शुभ अवसर पर भगवत साहित्य परिवार के तत्वाधान में वरिष्ठ साहित्यकार अनंगपाल सिंह अनंग की 11 पुस्तकों का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमचंद सृजन पीठ उज्जैन के निदेशक की अध्यक्षता,एकादश रुद्रपीठ हरिद्वार के संस्थापक संतोषानंद सरस्वती के मुख्य आतिथ्य, वरिष्ठ साहित्यकार, हिंदी की प्राध्यापक परम विदुषी डॉ राजरानी शर्मा के सारस्वत आतिथ्य, हिंदी के प्राध्यापक, साहित्यकार डॉ अमित शर्मा महासमर, और रमन शिक्षा समिति के अध्यक्ष हरिओम गौतम के विशिष्ट आतिथ्य में रेलवे स्टेशन परिसर स्थित होटल एंबिएंस के सभागार में संपन्न हुआ इस अवसर पर पुस्तकों के रचनाकार अनंगपाल सिंह अनंग भी मंचासीन रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ साहित्यकार राम लखन शर्मा अंकित ने किया। 
सर्वप्रथम सम्माननीय अतिथियों ने माँ वीणावादिनि की पूजा अर्चना और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, माँ सरस्वती की वंदना वरिष्ठ कवयित्री आशा पांडे ने प्रस्तुत की, तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों का स्वागत भगवत साहित्य परिवार के सदस्यों द्वारा शाल श्रीफल और माला पहनाकर किया गया, इस अवसर पर लंदन से पधारी कुमारी राध्या भदौरिया ने मधुर स्वर में सुंदर भजन प्रस्तुत किया, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ किंकर पाल सिंह जादौन ने रचनाकार का परिचय और कार्यक्रम के योग संयोग के बारे में विस्तार से बताया इसके बाद सम्माननीय अतिथियों द्वारा वरिष्ठ साहित्यकार अनंगपाल सिंह अनंग द्वारा विरचित श्री कृष्ण लीला चरित्रम के 11 खण्डों का लोकार्पण किया गया। तत्पश्चात नगर के सम्माननीय हिंदी प्राध्यापक डॉ ज्योति उपाध्याय, डॉ बलबीर सिंह गुर्जर, डॉ संगीता जैतवार, डॉ लाल डॉ मंदाकिनी शर्मा और चेतराम सिंह भदौरिया के साथ-साथ हिंदी के शोधार्थी छात्र शैलेंद्र सिंह, नीरज धाकड़, समर सिंह, अभिषेक राजपूत का सम्मान सम्माननीय अतिथियों द्वारा शाल, श्रीफल और माला पहनाकर किया गया। 
तत्पश्चात कार्यक्रम की सारस्वत अतिथि और समीक्षक परम विदुषी हिंदी की प्राध्यापक डॉ राजरानी शर्मा ने बहुत ही सूक्ष्म विवेचन कर सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की उन्होंने पुस्तकों को समाज उपयोगी बताया। समीक्षा के पश्चात रचनाकार अनंगपाल सिंह अनंग ने अपना विनम्र उद्बोधन प्रस्तुत किया इस अवसर पर चेतराम सिंह भदौरिया, शिवकुमार मिश्र, और अरविंद जादौन ने भी अपने विचार व्यक्त किये। तत्पश्चात विशिष्ट अतिथि हिंदी प्राध्यापक और साहित्यकार डॉ अमित शर्मा महासमर और रमन शिक्षा समिति के अध्यक्ष हरिओम गौतम ने पुस्तकों पर और रचनाकार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर सन्तोषानंद सरस्वती ने पुस्तकों की मानव जीवन में उपयोगिता और अनिवार्यता पर जोर दिया। 
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रेमचंद सृजन पीठ उज्जैन के पूर्व निदेशक जगदीश तोमर ने रचनाकार के लेखन और साहित्य के प्रति समर्पण भाव की भूरि भूरि प्रशंसा की। अंत में प्रतिपाल सिंह राजावत ने सभी का आभार व्यक्त किया।