मेहरा टोल से सिकरौदा तक सडक़ की हुई सैंपलिंग
Sep 03 2026
ग्वालियर। एक साल के भीतर 12 से ज्यादा सडक़ें धंसने और निर्माण गुणवत्ता पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब हाईकोर्ट की जांच नेशनल हाईवे तक पहुंच गई है। गुरुवार को हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने आगरा-मुंबई हाईवे पर मेहरा टोल प्लाजा और सिकरौदा चौराहे के बीच सडक़ को जेसीबी से खुदवाकर उसके निर्माण की गुणवत्ता की पड़ताल शुरू की।
जांच के दौरान सडक़ की अलग-अलग परतों से डामर, गिट्टी और बेस मटेरियल के नमूने लिए गए। इन सैंपलों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा, जहां यह जांच होगी कि निर्माण में तय मानकों और स्वीकृत सामग्री का पालन किया गया था या नहीं। हाईकोर्ट के निर्देश पर एनएचएआई के अधीन आने वाली सडक़ को मौके पर खोदकर जांचने की यह पहली कार्रवाई मानी जा रही है। जांच टीम की मौजूदगी में सडक़ की परतें हटाई गईं, ताकि कागजों में दर्ज तकनीकी विवरण और जमीन पर किए गए निर्माण का मिलान किया जा सके।
खराब सडक़ों की गुणवड्डाा को जांचने के लिए मेहरा टोल प्लाजा पर मशीन के माध्यम से कटिंग कर सैपलिंग की। इस दौरान उच्च न्यायालय द्वारा गठित कमेटी के सदस्य एवं एनएचएआई सहित विभागीय अधिकारी एवं पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। यह कमेटी द्वारा मेहरा टोल प्लाजा से लेकर सिकरौदा तक सैंपलिंग की जा रही है। इसके साथ ही सडक़ पर गड्ढा कर नीचे का बैस जांचने के लिए जेसीबी भी मौके पर मौजूद है।
बरसते बादलों के बीच गंरूवार को एनएचएआई की सडक़ों की जांच की गई। इसके लिए जमीन के अंदर ड्रिल कर तकरीबन 1 फीट तक लंबाई का सैंपल लिया गया। सडक़ के सैंपलों को जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। इस सैंपल से यह पता चलेगा कि सडक़ पर कितनी मुरम, गिट्टी का कितना मोटा बैस है और उस पर कितनी लेयर में गिट्टी और डामर की परत चढ़ी हुई हैं। इससे पूर्व कमेटी ने स्कैनिंग मशीन के माध्यम से पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई जा रही विक्की फैक्ट्री से चेतकपुरी तक रोड का सैंपल लिया था।
शहर की खस्ताहाल सडक़ों को लेकर लगाई गई याचिका की आंच नगर निगम से लेकर एनएचएआई तक पहुंच चुकी है। वर्तमान समय में एनएचएआई की भी सडक़ें खराब हो रही हैं। जिसके कारण हादसों की आशंका बना रही है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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