भगवान बलराम शेषनाग का अवतार और बल, शक्ति के देवता भी माना जाता-हरीश अग्रवाल

Sep 02 2026

ग्वालियर। बलराम जन्मोत्सव (बलराम जयंती है या हल षष्ठी) भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के प्रकट उत्सव रूप में भाद्र पक्ष मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर को मनाया गया। इसी क्रम में महारानी लक्ष्मीबाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर हरीश अग्रवाल ने कहा कि भगवान बलराम शेषनाग का अवतार और बल, शक्ति के देवता भी माना जाता है। उनका मुख्य शस्त्र हल था। इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में इसको लेकर बहुत परंपराएं हैं। हल षर्ष्ठी के दिन हल की पूजा की जाती है, इस कारण इस दिन खेत में हल नहीं चलाया जाता है और हल से जुति भूमि पर उगाया गया फल एवं सब्जियां खाना वर्जित है। इस दिन हिंदू माताएं अपनी संतान के दीर्घायु एवं सुख समृद्धि के लिए व्रत रखते हैं ब्रज क्षेत्र में और दाऊजी मंदिरों में इस दिन विशेष मेले और उत्सव का आयोजन किया जाता है। राजनीति विज्ञान विभाग की विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर कुसुम भदौरिया ने कहा कि भगवान बलराम को हलधर कहा जाता है जो आधुनिक युग में अन्नदाता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के परिश्रम का प्रतीक है आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में यह पर्व आंतरिक शांति, संगम और स्वास्थ्य की प्रेरणा देता है यह पर्व भाई के प्रति प्रेम कर्तव्य,निष्ठा और धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देता है।
 प्रोफेसर रियाज अली ने कहा कि भगवान बलराम ने कौरवों और पांडवों को गदा की समान शिक्षा दी जो बताता है कि वह न्याय और कर्तव्य के मार्ग पर चले और पक्षपात से दूर रहे भगवान कृष्ण के प्रति उनका अगाध प्रेम और सहयोग अटूट था वे हमेशा कृष्ण के रक्षक और सहायक के रूप में रहे उन्होंने भाई बहन के प्रति इसमें और सम्मान आपसी सहयोग का पाठ पढ़ाया। डॉ ज्योति शुक्ला ने कहा कि भगवान बलराम के हाथ में हल है जो इस बात का प्रतीक है कि अन्न उपजाना और श्रम करना पवित्र कार्य है। प्रोफेसर रवि रंजन ने कहा कि गौड़ीय वैष्णव परंपरा मे उन्हें आदि गुरु माना जाता है जो भक्तों के हृदय में भगवान के प्रति और सत्य का ज्ञान जागृत करते हैं। इस कार्यक्रम में प्रोफेसर विभा दूर्वा, डॉ शशि कला राठौड़ आदि सम्मिलित हुए। एवं कार्यक्रम का संचालन डॉ अनीता मेवाफरोज एवं आभार प्रदर्शन डॉ ज्योत्सना राजपूत ने किया।