अक्षय ऊर्जा वह ऊर्जा है जिसमें न के बराबर हानिकारक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है: डॉ. रामकिशोर उपाध्याय

Aug 29 2026

ग्वालियर। अक्षय ऊर्जा का उत्पादन प्रदूषण रहित प्राकृतिक स्रोतों से किया जाता है और यह लगातार मिलती रहती है कभी खत्म नहीं होती । सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल विद्युत के साथ साथ बायोगैस व जैव ऊर्जा से भी इसे प्राप्त किया जा सकता है। अक्षय ऊर्जा वह ऊर्जा है जिसमें न के बराबर हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। ऊर्जा की खपत को कम एवं संतुलित रख कर, ऊर्जा दक्ष उपकरणों को उपयोग में लाकर, ग्रीन बिल्डिंग निर्माण के साथ सार्वजनिक परिवहन को अपना कर हम ऊर्जा को संरक्षित कर सकते हैं। यह बात माधव महाविद्यालय की आईक्यूएसी के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित ‘अक्षय ऊर्जा उत्पादन एवं संरक्षण’ विषय पर मुख्यवक्ता की आसंदी से बोलते हुए डॉ. रामकिशोर उपाध्याय ने कही। अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉ. संजय कुमार पाण्डेय ने की।
आयुक्त उच्चशिक्षा से प्राप्त भारतीय ज्ञान परम्परा के त्रैमासिक कैलेण्डर की गतिविधि के अंतर्गत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रभारी प्राचार्य डॉ. संजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि अक्षय ऊर्जा का उत्पादन और संरक्षण आज की अनिवार्य जरूरत है। लगातार घटते ऊर्जा स्रोतों के चलते आज समूचा विश्व ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। दूसरी ओर वैश्विक परिदृश्य ने भी ऊर्जा संकट खड़ा किया हुआ है। समय रहते हमें ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को अपनाना ही होगा। 
कार्यक्रम का संचालन प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. मनोज अवस्थी ने तथा आभार प्रदर्शन डॉ. विकास शुक्ल ने किया। इस अवसर पर डॉ. संजय रस्तोगी, डॉ. संतोष शर्मा, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. विजय पाण्डेय, डॉ. मंदाकिनी शर्मा, डॉ.राकेश करहेरिया, डॉ. दीपक शिन्दे, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. सरिता दीक्षित, डॉ. दीप्ति नारंग आदि उपस्थित रहे।