सद्गुरु परमात्मा की श्रीमत पर चलकर जीवन को बनाएं श्रेष्ठ : बीके आदर्श दीदी

Jul 30 2026

ग्वालियर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर माधवगंज स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रभु उपहार भवन में एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाई-बहनों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर सद्गुरु परमपिता परमात्मा शिव बाबा का स्मरण करते हुए आध्यात्मिक ज्ञान एवं राजयोग ध्यान का लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ केन्द्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में सद्गुरु परमपिता परमात्मा शिव बाबा स्वयं इस धरा पर आकर मानव आत्माओं को सत्य ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का वास्तविक महत्व सद्गुरु परमात्मा से ज्ञान, शक्ति, पवित्रता और दिव्य गुणों का वरदान प्राप्त कर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने में है। जब हम परमात्मा की श्रीमत पर चलते हैं, तब हमारा जीवन सुख, शांति और आनंद से भर जाता है।
मोटिवेशनल स्पीकर बीके डॉ. गुरचरण सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके दिव्य गुणों और श्रेष्ठ संस्कारों से होती है। उन्होंने प्रेम, नम्रता, धैर्य, सहयोग, क्षमा और सहनशीलता जैसे गुणों को जीवन में धारण करने पर बल देते हुए कहा कि यही गुण व्यक्ति को समाज में सम्मान और सफलता दिलाते हैं। वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद भाई ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानव जीवन श्रेष्ठ जीवन तभी बनता है जब हम हमेशा दूसरों के प्रति कल्याण का भाव रखते है और अपने आचरण से दूसरों को प्रेरणा देते है। आगे उन्होंने राजयोग ध्यान का महत्व बताते हुए कहा कि आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में राजयोग ध्यान मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को बढ़ाने का सरल एवं प्रभावी माध्यम है। उन्होंने उपस्थित सभी भाई-बहनों को राजयोग ध्यान का अभ्यास भी कराया, जिससे सभी ने गहन शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने विश्व शांति, मानव कल्याण एवं श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त समाज निर्माण का संकल्प लिया। गुरु पूर्णिमा के इस आध्यात्मिक आयोजन ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के जीवन में नई ऊर्जा, प्रेरणा और आत्मिक जागृति का संचार किया। इस अवसर पर बीके सुरभि, बीके रोशनी, बीके जीतू, बीके पवन सहित कार्यक्रम में एक हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं नें ज्ञान लाभ लेते हुए ब्रह्माभोजन (प्रसादी) ग्रहण किया।