एनडीपीएस एक्ट में विवेचना हेतु एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

Jul 26 2026

ग्वालियर। पुलिस मुख्यालय मध्यप्रदेश नारकोटिक्स शाखा भोपाल से प्राप्त निर्देशों के पालन में केंद्र सरकार की नशा मुक्त भारत पहल के अंतर्गत प्रदेशभर में संचालित ‘’नशे से दूरी है जरूरी 2.0’’ अभियान के क्रम में मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई एवं एनडीपीएस एक्ट के अपराधों की गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एसएसपी धर्मवीर सिंह  के मार्गदर्शन में 26 जुलाई को पुलिस कंट्रोल रूम सभागार में जिले के विवेचना अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों की वैज्ञानिक, तकनीकी एवं विधिसम्मत विवेचना को और अधिक प्रभावी बनाना, विवेचना अधिकारियों को नवीन कानूनी प्रावधानों से अवगत कराना तथा एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत दर्ज प्रकरणों में दोषियों के विरुद्ध मजबूत एवं न्यायालय में टिकाऊ अभियोजन सुनिश्चित करना था। वर्तमान में संचालित ‘’नशे से दूरी है जरूरी 2.0’’ अभियान के दौरान जनजागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
कार्यशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल), डॉ. विनोद ढींगरा द्वारा विवेचना अधिकारियों को मादक पदार्थों के विभिन्न प्रकार, उनकी पहचान, वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया, घटनास्थल से साक्ष्य संकलन, साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण, मौके पर वीडियोग्राफी कराने की आवश्यकता, टेस्टिंग किट के सही उपयोग तथा एनडीपीएस एक्ट की धारा 52ए के अंतर्गत मादक पदार्थों के नमूने लेने, सीलिंग एवं विधि सम्मत कार्यवाही के संबंध में विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने मादक पदार्थों की पहचान, उनकी पैकेजिंग, नमूना संग्रहण एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व को उदाहरणों सहित समझाया।
विशेष न्यायालय(नारकोटिक्स) ग्वालियर के अपर जिला लोक अभियोजक धर्मेन्द्र शर्मा ने एनडीपीएस एक्ट, 1985 के विभिन्न कानूनी प्रावधानों, न्यायालयीन प्रक्रिया तथा प्रभावी अभियोजन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि एनडीपीएस एक्ट के प्रत्येक प्रकरण में विधिक प्रक्रिया का अक्षरश: पालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिनियम की विभिन्न धाराओं के व्यावहारिक उपयोग, तलाशी एवं जप्ती की वैधानिक प्रक्रिया, दस्तावेजीकरण, केस डायरी लेखन तथा न्यायालय में सशक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने के संबंध में विस्तार से मार्गदर्शन दिया। साथ ही उन्होंने विवेचना अधिकारियों द्वारा मैदानी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए न्यायालयीन निर्णयों के आधार पर महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं की भी जानकारी साझा की और विवेचकों को यह भी बताया गया कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य एवं विधिसम्मत दस्तावेजीकरण ही न्यायालय में सफल अभियोजन की आधारशिला हैं। कार्यशाला के दौरान विवेचना अधिकारियों को एनडीपीएस एक्ट के महत्वपूर्ण प्रावधानों, धारा 52ए के अंतर्गत की जाने वाली कार्यवाही, घटनास्थल की अनिवार्य वीडियोग्राफी, टेस्टिंग किट के वैज्ञानिक उपयोग, मादक पदार्थों के वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित मामलों में अनुसंधान करने, तथा आदतन मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध पीआईटी-एनडीपीएस के अंतर्गत की जाने वाली निरोधात्मक कार्यवाही के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। 
कार्यशाला में उपस्थित निरीक्षक, थाना प्रभारी एवं उपनिरीक्षकों ने प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। प्रशिक्षण का स्वरूप पूर्णत: व्यवहारिक एवं संवादात्मक रहा, जिससे अधिकारियों को अपने दैनिक कार्यों में इन प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी।