किसानों के लिए मुसीबत बनी फार्मर आईडी,खाद के टोकन के लिए दर-दर भटक रहे अन्नदाता

Jul 23 2026

भितरवार। किसानों को सुविधाएं आसानी से मिले इसके लिए शासन प्रशासन ने फार्मर आईडी को अनिवार्य किया है। लेकिन रिकार्ड की त्रुटियां,सर्वर की धीमी गति और तकनीकी खामियों से किसानों के लिए किसान पहचान पत्र मुसीबत बन गया है। फार्मर आईडी न होने पर किसानों को खाद का टोकन प्राप्त करने में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। स्थिति यह है। कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है। उन किसानों को खाद का टोकन भी जारी नहीं हो पा रहा है। जिससे उनके कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसान पहचान पत्र के लिए भितरवार तहसील सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसान प्रतिदिन अपने दस्तावेज लेकर कभी पटवारी तो कभी राजस्व निरीक्षक,तो कभी तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। कई किसानों के भूमि अभिलेखों में नाम,पिता के नाम, खसरा नंबर, आधार लिंकिंग या अन्य जानकारी में त्रुटियां हैं।
इन गड़बडिय़ों के कारण ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है और फार्मर आईडी बनने का काम अटक गया है। समस्या केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। किसानों का कहना है। कि जब वे दस्तावेजों में सुधार कराने पहुंचते हैं। तो कभी सर्वर बंद होने,कभी पोर्टल नहीं चलने और कभी सिस्टम में तकनीकी खराबी का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। कई किसान लगातार कई दिनों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन उनकी समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो पा रहा है। वर्तमान समय में धान सहित खरीफ फसलों की बुवाई का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। खेतों में समय पर खाद डालना आवश्यक है। लेकिन फार्मर आईडी नहीं बनने के कारण किसानों को खाद का टोकन नहीं मिल पा रहा। इससे बुवाई,फसल की बढ़वार और अन्य कृषि कार्य प्रभावित होने लगे हैं। किसानों का कहना है। कि यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं हुआ तो उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। जिसका सीधा नुकसान किसानों की आय पर पड़ेगा। 
वहीं क्षेत्र के किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य शासन से मांग की है। कि फार्मर आईडी से संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं,राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियों का तत्काल सुधार कराया जाए तथा सर्वर और पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को दूर किया जाए। साथ ही जिन किसानों की फार्मर आईडी तकनीकी कारणों से अभी तक नहीं बन सकी है। उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के तहत खाद का टोकन जारी किया जाए ताकि  उनकी खेती प्रभावित न हो और उन्हें सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिल सके। ग्राम सोंता खिरिया के किसान रामसेवक शर्मा ने बताया कि भितरवार क्षेत्र में यह समस्या मेरी अकेले की नहीं,अब सैकड़ों किसानों की चिंता का विषय बन चुकी है। यदि प्रशासन ने शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए तो खाद वितरण की व्यवस्था प्रभावित होने से खेती पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है। हम किसानों को उम्मीद है कि समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन जल्द राहत प्रदान करेगा ताकि समय पर खेती के कार्य पूरे कर सकें।