‘स्वस्थ मस्तिष्क, सबके लिए उपचार’ न्यूरोसर्जरी विभाग का जनजागरूकता अभियान

Jul 22 2026

ग्वालियर। विश्व मस्तिष्क दिवस 2026 का विषय  स्वस्थ मस्तिष्क सभी के लिए सुलभ उपचार है। इस अवसर पर गजरा राजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) एवं जेएएच ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, ग्वालियर के न्यूरोसर्जरी विभाग द्वारा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को मस्तिष्क संबंधी रोगों की समय पर पहचान, शीघ्र उपचार तथा सभी तक गुणवत्तापूर्ण न्यूरोलॉजिकल एवं न्यूरोसर्जिकल सेवाएँ पहुँचाने के लिए जागरूक करना था। न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा ने बताया कि मस्तिष्क से संबंधित बीमारियाँ आज विश्वभर में विकलांगता और मृत्यु का एक प्रमुख कारण हैं, लेकिन यदि समय रहते पहचान और उपचार हो जाए तो अधिकांश रोगियों का जीवन बचाया जा सकता है तथा उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जीआरएमसी एवं जे.ए. हॉस्पिटल्स में प्रत्येक माह लगभग 500 से अधिक रोगी मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र से संबंधित गंभीर बीमारियों जैसे ब्रेन ट्यूमर, मेनिन्जाइटिस, हाइड्रोसिफेलस, मिर्गी (सीजर), सिर की गंभीर चोट (हेड इंजरी), मस्तिष्क में रक्तस्राव (ब्रेन हेमरेज), स्ट्रोक तथा जन्मजात मस्तिष्क एवं रीढ़ की विकृतियों के उपचार हेतु भर्ती होते हैं। ये रोगी मध्यप्रदेश के 15 से अधिक जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी यहाँ पहुँचते हैं। सभी रोगियों का उपचार शासन की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत नि:शुल्क अथवा अत्यंत रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि विभाग में प्रति माह लगभग 200 जटिल मस्तिष्क एवं न्यूरोसर्जरी ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जाते हैं। अत्याधुनिक तकनीकों, अनुभवी चिकित्सकों तथा बहुविषयक टीम के समन्वय से जटिल से जटिल मामलों का भी सफल उपचार संभव हो पा रहा है।
विश्व मस्तिष्क दिवस के अवसर पर विभाग ने हाल ही में सफलतापूर्वक उपचारित 8 वर्षीय बालक निवासी जोहरा मुरैना को सम्मानित कर अस्पताल से छुट्टी प्रदान की। कुछ दिन पूर्व यह बालक दुर्घटनावश कैंची पर गिर गया था, जिससे कैंची का नुकीला भाग उसकी खोपड़ी को भेदते हुए मस्तिष्क तक पहुँच गया था। यह अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं जीवन-रक्षक शल्य चिकित्सा थी। यह ऑपरेशन प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा के नेतृत्व में डॉ. विवेक कंकने, न्यूरोसर्जरी रेजिडेंट्स एवं एनेस्थीसिया टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। न्यूरोसर्जरी, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी एवं अन्य विभागों की संयुक्त टीम ने सूक्ष्म योजना, आधुनिक इमेजिंग तथा सावधानीपूर्वक शल्यक्रिया द्वारा कैंची को सुरक्षित निकाला और मस्तिष्क की मरम्मत की। सफल उपचार के बाद बालक पूर्णत: स्वस्थ होकर आज अस्पताल से छुट्टी प्राप्त कर रहा है। इस अवसर पर चिकित्सकों ने उसे पुष्पगुच्छ एवं शुभकामनाएँ देकर सम्मानित किया। प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति में लगातार सिरदर्द, बार-बार उल्टी, बेहोशी, दौरे पडऩा, शरीर के किसी भाग में कमजोरी या लकवा, बोलने में कठिनाई, याददाश्त में कमी, चलने में असंतुलन, अचानक दृष्टि धुंधली होना, सिर में गंभीर चोट या बच्चों में सिर का असामान्य रूप से बढऩा जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण मस्तिष्क की गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं, जिनका शीघ्र विशेषज्ञ चिकित्सक से परीक्षण एवं उपचार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्व मस्तिष्क दिवस का संदेश केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि रोकथाम भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सडक़ दुर्घटनाओं से बचाव के लिए हेलमेट एवं सीट बेल्ट का अनिवार्य उपयोग करें, शराब पीकर वाहन न चलाएँ, धूम्रपान एवं नशीले पदार्थों से दूर रहें, उच्च रक्तचाप, मधुमेह एवं कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें, नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें तथा पर्याप्त नींद लें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अनेक मस्तिष्क रोगों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ‘स्वस्थ मस्तिष्क प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है। समय पर पहचान, शीघ्र उपचार और सभी तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की पहुँच ही विश्व मस्तिष्क दिवस 2026 का मूल संदेश है।‘