बुंदेलखंड विद्रोह 1842 नाटक का हुआ मंचन

Jul 16 2026

ग्वालियर। संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा महाकवि कालिदास जयंती एवं वंदे मातरम के 150 वर्ष के अवसर पर युवा रंगमंच से राष्ट्र जागरण के अंतर्गत बुंदेलखंड विद्रोह 1842 नाटक का अद्भुत मंचन किया गया। इसकी सबसे बड़ी विशेषता बुंदेलखंड की लोकनाट्य स्वांग शैली थी। इस नाटक’ में 1857 से पहले अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने वाला प्रथम उभार था। नाटक में मधुकर शाह, हृदय शाह, बखतबली, विक्रमजीत सिंह, जवाहर सिंह जैसे वीरों के शौर्य और बलिदान को मंच पर जीवंत किया गया। अंत में कूटनीति से मधुकर शाह को फांसी और गणेश जू को काला पानी की सजा दिखाई गई। आल्हा-गायन, लोकगीत, ढोलक, नगाड़ा, टिमकी, खंजरी के साथ युद्ध ध्वनियों ने माहौल को जीवंत बना दिया। मंच-सज्जा और वेशभूषा ने बुंदेलखंड की अस्मिता को उजागर, किया। इस मौके पर निर्देशक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा यह नाटक विस्मृत गौरवगाथा को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास है। 
मुख्य अतिथि के रूप में जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु राजकुमार आचार्य, राजा मानसिंह तोमर विवि की कुलगुरु स्मिता सहस्त्रबुद्धे प्रोफेसर राजेंद्र खटीक सहित संस्कार भारती, अभाविपु के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।