चिकित्सकों ने बचाई 14 वर्षीय रोगी की जान
Jul 14 2026
ग्वालियर। चिकित्सा विज्ञान, सूक्ष्म योजना और विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट समन्वय का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जीआर मेडिकल कॉलेज एवं जेए ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के न्यूरोसर्जरी एवं जनरल सर्जरी विभाग की टीम ने 14 वर्षीय रोगी के मस्तिष्क एवं पैर में धंसे त्रिशूल को सफलतापूर्वक निकालकर उसकी जान बचाई।
14 वर्षीय शिवम निवासी ग्राम किशनगढ़ धरकुआ जिला छतरपुर, के पिता राकेश ने बताया कि शिवम माता की मढ़िया पर खेल रहा था। खेलते समय उसका पैर फिसल गया और वह लगभग एक मंजिल की ऊंचाई से नीचे लगे त्रिशूल पर गिर गया। त्रिशूल का एक सिरा उसकी बाईं आंख के रास्ते मस्तिष्क में प्रवेश कर खोपड़ी के विपरीत दिशा के फ्रंटल बोन के आर-पार हो गया, जबकि दूसरा त्रिशूल उसके बाएं पैर में धंस गया।
घटना के तुरंत बाद शिवम को पहले शासकीय अस्पताल किशनगढ़ ले जाया गया। वहां से उसे जिला अस्पताल छतरपुर रेफर किया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जेए ट्रॉमा सेंटर ग्वालियर भेजा गया। मामला अत्यंत जटिल होने के कारण रोगी को ट्रॉमा सेंटर से न्यूरोसर्जरी विभाग में स्थानांतरित किया गया।
ऑपरेशन से पहले मरीज की विस्तृत जांच की गई। नॉन-कॉन्ट्रास्ट सीटी स्कैन, सीटी एंजियोग्राफी, वेनोग्राफी तथा पैर का विस्तृत एक्स-रे किया गया। साथ ही कलर डॉप्लर जांच के माध्यम से विभिन्न रक्त वाहिकाओं की स्थिति का आकलन किया गया, जिससे संभावित वैस्कुलर इंजरी एवं रक्तस्राव के जोखिम का अनुमान लगाया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यूरोसर्जरी एवं जनरल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से विस्तृत ऑपरेटिव योजना तैयार की। योजना का उद्देश्य त्रिशूल को सुरक्षित रूप से निकालना, आंख की दृष्टि को यथासंभव सुरक्षित रखना, मस्तिष्क एवं खोपड़ी में बने दोष की मरम्मत करना तथा मस्तिष्कमेरु द्रव के रिसाव को रोककर संक्रमण के जोखिम को न्यूनतम करना था।
दिनांक 26 जून 2026 को यह जटिल शल्यक्रिया न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुई। न्यूरोसर्जरी विभाग से डॉ. आनंद शर्मा तथा जनरल सर्जरी विभाग से प्रो. डॉ. एम. एम. मुद्गल एवं डॉ. अनिल शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शल्यक्रिया में एनेस्थीसिया विभाग, न्यूरोसर्जरी एवं जनरल सर्जरी के रेजिडेंट चिकित्सकों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। सफल ऑपरेशन के दौरान रोगी के मस्तिष्क एवं पैर में धंसे त्रिशूल को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान संभावित रक्तस्राव के जोखिम को ध्यान में रखते हुए विशेष सावधानी बरती गई और सभी जटिलताओं का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया गया। ऑपरेशन के बाद रोगी पूरी तरह सचेत एवं ओरिएंटेड है, उसके चारों हाथ-पैर सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं तथा उसकी दृष्टि भी सुरक्षित है।
चिकित्सकों के अनुसार यह सफलता सभी विभागों की सूक्ष्म पूर्व-योजना, आधुनिक जांचों, टीमवर्क और बहुविषयक समन्वय का परिणाम है। डॉक्टर्स डे के अवसर पर यह सफल उपचार चिकित्सा सेवा, समर्पण और टीम भावना का प्रेरणादायक उदाहरण है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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