कुलैथ के जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा की तैयारियां पूर्ण

Jul 14 2026

ग्वालियर। ग्राम कुलैथ में स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में इस वर्ष रथयात्रा उत्सव को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिर में विराजमान 179 वर्ष पुरानी भगवान श्री जगन्नाथ जी, बहन सुभद्रा जी और भाई बलदाऊ जी की दिव्य काष्ठ मूर्तियों का डॉ. (श्रीमती) अश्विनी महेंद्र अग्रवाल द्वारा अत्यंत मनोहारी और भव्य श्रृंगार किया गया है। ग्वालियर निवासी डॉ. अग्रवाल पिछले कई वर्षों से मंदिर में अपनी निस्वार्थ सेवाएं दे रही हैं। मंदिर के पुजारी श्री किशोरीलाल को यह परिवार अपना गुरु मानता है। गौरतलब है कि महाप्रभु के आदेश और गुरु कृपा से इन प्राचीन मूर्तियों का पहली बार श्रृंगार भी वर्ष 2025 में डॉ. अश्विनी अग्रवाल द्वारा ही किया गया था।
मान्यताओं और अनन्य भक्ति के चलते डॉ. अश्विनी अग्रवाल द्वारा जब भी महाप्रभु को अपने हाथों से 'चावल भरे घटÓ (कलश) अर्पित किए गए, प्रभु ने उन्हें सहर्ष स्वीकार किया। गुरु की असीम अनुकंपा से उनके गृह निवास पर भी महाप्रभु के सम्मुख चावल से भरे घट रखते ही प्रभु जगन्नाथ जी द्वारा भोग स्वीकार किए जाने का अद्भुत संयोग देखा गया है। तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों कार्यक्रम:15 जुलाई बुधवार की सुबह 'ज्वर लीलाÓ के समापन के बाद महाप्रभु अपने नवयौवन रूप में भक्तों को अलौकिक दर्शन देंगे। इसी के साथ दो दिवसीय भव्य मेले का शुभारंभ होगा जिसमें 16 जुलाई गुरुवार को दोपहर 3 बजे महाप्रभु को मंदिर में चावल भरे घट अर्पित किए जाएंगे। इसके तुरंत बाद रथयात्रा ग्राम कुलैथ से जनकपुरी मैदान के लिए प्रस्थान करेगी। पूरे रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा रथयात्रा का भव्य स्वागत-सत्कार किया जाएगा। प्रभु रात्रि विश्राम जनकपुरी में करेंगे, जहां रातभर भक्त भजन-कीर्तन करेंगे।
17 जुलाई शुक्रवार शाम करीब 4 बजे जनकपुरी मैदान में महाप्रभु की भव्य आरती होगी। इसके बाद भगवान के सामने चावल भरे घट चढ़ाए जाएंगे, जो जन आस्था के अनुसार स्वयं चार भागों में विभाजित हो जाते हैं। इसके पश्चात प्रसिद्ध महाप्रसाद 'भगवान का भात, दुनिया पसारे हाथÓ का वितरण किया जाएगा। मंदिर में पुनर्स्थापनामहाप्रसाद वितरण के बाद रथयात्रा सम्मान सहित वापस मुख्य मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। कुलैथ मंदिर पहुंचने पर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भ्राता बलदाऊ जी को पुन: गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु रातभर भजन-कीर्तन का आनंद लेंगे और रात्रि करीब 8 बजे भगवान के समक्ष अंतिम बार चावल घट अर्पित किए जाएंगे। इस भव्य उत्सव को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।