रिटायर मतलब रुकना नहीं, रफ्तार बदलना है: जस्टिस जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी

Jul 05 2026

ग्वालियर। सुप्रीम कोर्ट के निवर्तमान न्यायाधिपति जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी का ग्वालियर में भव्य सम्मान एवं विदाई समारोह आयोजित किया गया। समारोह में उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज के समय में पद, प्रतिष्ठा, धन सब कुछ पाया जा सकता है, लेकिन दुआ पाना मुश्किल है। जहां दुआ काम आती है वहां धन और पद कोई काम नहीं आते। उन्होंने कहा कि ‘रिटायर मतलब रुकना नहीं, रफ्तार बदलना है। थकान को रिटायर करेंगे, जोश को नहीं। अपने गुरु स्व. श्री लाहोटी जी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने मुझे सिखाया था। ‘आप अपना काम कीजिए, हमें अपना पक्ष रखने का अधिकार है, निर्णय देने का नहीं।‘
जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि पेड़ कितना भी बड़ा और ऊंचा हो जाए, लेकिन उसकी ताकत जड़ों में होती है। उन्होंने गुरु के पत्र की कुछ पंक्तियां पढ़ते हुए कहा कि कभी भी खुद को सर्वोच्च न मानें, बल्कि कर्म को सर्वोच्च मानें। उन्होंने युवाओं को पॉजिटिव रहने और मातृभूमि से प्रेम व कर्मभूमि से निष्ठा रखने का संदेश दिया। कहा कि जो जीतता है वह कई लोगों को पीछे छोड़ देता है, और जो हारता है वह कई लोगों से सीख लेता है।
परिवार की परिभाषा बताते हुए उन्होंने कहा कि मेरा परिवार बहुत बड़ा है। पत्नी, बच्चे, बहू और वे सभी लोग जिन्होंने मेरे हर काम में सहयोग किया, वे सभी मेरे परिवार हैं। उन्होंने वकीलों को संबोधित करते हुए कहा कि हर वकील का नजरिया अलग होता है। मछली कभी बैल को नहीं देख सकती, इसी तरह हर कोई अपनी सीमा में ही देख पाता है। 
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने घोषणा की कि वे युवाओं को कानून की पढ़ाई के लिए प्रेरित करेंगे और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की फीस में मदद भी करेंगे, ताकि कोई शिक्षा से वंचित न रहे। कानून जगत में उनके कार्यकाल को आने वाली पीढिय़ों के लिए नजीर माना जाएगा।