भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए पहले भारत को जानना होगा: डॉ. गोविंद प्रसाद शर्मा

Jul 04 2026

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में भारतीय शिक्षा दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, मध्यभारत प्रांत एवं विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता अखिल भारतीय विद्या भारती संस्थान नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के पूर्व मध्यप्रांत संगठन मंत्री डॉ. गोविन्द प्रसाद शर्मा रहे। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय प्रचार प्रसार सह संयोजक प्रो. आयुष गुप्ता थे। अध्यक्षता जेयू के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने की। विशेष अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संचालक प्रहलाद सबनानी, प्रांत संयोजक शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास धीरेन्द्र सिंह भदौरिया, संयोजक राजकुमार वाजपेयी एवं प्रांत संयोजक चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास डॉ. समीर मंचासीन रहे। 
मुख्य वक्ता डॉ. गोविन्द प्रसाद शर्मा ने कहा कि स्वराष्ट्र, स्वभाषा, स्वधर्म और स्वसंस्कृति को अपनाने से ही वास्तविक भारतीयता का बोध संभव है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का उद्देश्य शिक्षा में भारतीय जीवन मूल्यों का पुनर्स्थापन करना है। मुख्य अतिथि प्रो. आयुष गुप्ता ने संविधान के प्रथम अनुच्छेद का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत केवल एक नाम नहीं, बल्कि हमारी मूल पहचान है। उन्होंने कहा कि भारतीय चेतना आध्यात्मिक आधार पर स्थापित है, इसलिए शिक्षा में भी आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश आवश्यक है। विभाग संयोजक राजकुमार वाजपेयी ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की स्थापना, उद्देश्यों एवं उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्था के स्थापना दिवस को भारतीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वक्ताओं ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए पहले भारत को जानना, फिर मानना और अंतत: स्वयं भारत बनना होगा। इस दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा विश्वविद्यालयों में भारत शब्द के प्रयोग को प्रोत्साहित किए जाने का भी उल्लेख किया गया। संचालन डॉ. समीर भार्गव ने किया। 
कार्यक्रम में प्रो. शांतिदेव सिसौदिया, प्रो. जेएन गौतम, डॉ. सुशील मंडेलिया, प्रो. डीके वर्मा, डॉ. गजेन्द्र देव, डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. वंदना सेन, डॉ. रेखा श्रीवास्तव, डॉ. मनोज गौर सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।