सामाजिक-आर्थिक नियोजन और नीति निर्माण में सांख्यिकी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है : डॉ. पाण्डेय

Jul 01 2026

ग्वालियर। दैनिक जीवन में सांख्यिकी का उपयोग कार्य को प्रामाणिकता प्रदान करता है। इसके प्रति सभी को संवेदनशील होना चाहिए। सांख्यिकी नीतियों को आकार देने और तैयार करने में मदद करती है। सामाजिक-आर्थिक नियोजन और नीति निर्माण में सांख्यिकी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। अत: युवाओं को विशेष रूप से इस संदर्भ में जागरूक होना चाहिए। परिणामों की तालिकाओं को ग्राफ या चार्ट के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है इससे उन्हें समझना और उनकी व्याख्या करना आसान हो जाता है। सांख्यिकी के प्रमुख चार चरण होते हैं पहला प्रश्न पूछना, दूसरा डेटा एकत्रित करना, तीसरा डेटा का विश्लेषण करना और चौथा परिणामों की व्याख्या करना। यह बात राष्ट्रीय सेवा योजना, माधव महाविद्यालय इकाईयों द्वारा राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर आयोजित व्याख्यान में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. संजय कुमार पाण्डेय ने कही। विशिष्ठ अतिथि रासेयो जिलासंगठक डॉ. मनोज अवस्थी थे।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस प्रति वर्ष भारतीय सांख्यिकी के जनक प्रो.प्रशांत चन्द्र महालनोबिस की जन्मजयंती पर मनाया जाता है। इस वर्ष इसकी थीम को ‘प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना’ रखा गया है। रासेयो द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रभारी प्राचार्य डॉ.संजय कुमार पाण्डेय व जिलासंगठक डॉ. मनोज अवस्थी का अंगवस्त्र पहना कर स्वागत पूर्व रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डॉ.दीपक शिन्दे एवं समाज शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश करहेरिया ने किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सरिता दीक्षित ने किया।
इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि जिलासंगठक रासेयो डॉ. मनोज अवस्थी ने कहा कि सांख्यिकी का उपयोग अनुसंधान करने, परिणामों का मूल्यांकन करने, आलोचनात्मक सोच विकसित करने और आंकड़ों के समूह के बारे में सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए किया जाता है। सांख्यिकी का उपयोग लगभग किसी भी अध्ययन क्षेत्र में यह जानने के लिए किया जाता है कि घटनाएं क्यों घटित होती हैं , कब घटित होती हैं और क्या उनकी पुनरावृत्ति पूर्वानुमानित होती है। युवा विद्यार्थी व शोधार्थियों के लिए सांख्यिकी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।