शिवाजी के विचारों, सिद्धांतों पर चलेंगे तो हम अपना सर्वश्रेष्ठ मातृभूमि को समर्पित कर सकेंगे:.अशोक पाठक

Jun 27 2026

ग्वालियर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आजाद बस्ती, मुरार द्वारा शनिवार की सुबह आजाद नगर पार्क मुरार में हिंदू साम्राज्य दिवस कार्यक्रम हुआ जिसमें 60 स्वयंसेवक उपस्थित थे। कार्यक्रम में मुख्यवक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अशोक पाठक का बौद्धिक सभी को सुनने का अवसर मिला। उन्होंने छत्रपति शिवाजी के जीवन के बारे प्रकाश डालते हुए  विस्तार से बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक महान शासक थे। उन्होंने 17वीं सदी में मुगलों और बीजापुर सल्तनत के अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष कर ‘हिंदवी स्वराज्य’ की स्थापना की। उन्हें अपनी  रणनीतियों, गुरिल्ला युद्ध जैसी प्रणाली और कुशल प्रशासन के लिए इतिहास में अमर माना जाता है। 
शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को पुणे के निकट शिवनेरी के दुर्ग में हुआ था। उनके पिता शाहजी भोंसले बीजापुर सल्तनत में एक सेनापति थे और माता जीजाबाई एक अत्यंत धार्मिक और साहसी महिला थीं। माता जीजाबाई ने शिवाजी में नेतृत्व, युद्ध कला और कूटनीति के गुणों का विकास किया।.स्वराज्य की स्थापन मात्र 15-16 वर्ष की आयु में उन्होंने तोरणा किले को जीतकर अभियानों की शुरुआत की।उन्होंने युद्ध में कई महत्वपूर्ण किलों पर अधिकार किया। बीजापुर के सुल्तान द्वारा भेजे गए विशाल सेनापति अफजल खान को शिवाजी ने अपनी कूटनीति और वीरता से परास्त किया। मुगलों से संघर्ष और छापामार युद्ध शिवाजी ने मुगल सम्राट औरंगजेब की विशाल सेना को अपनी गुरिल्ला युद्धनीति से भारी नुकसान पहुँचाया।औरंगज़ेब ने अपने मामा शाहिस्ता खान और बाद में राजा जयसिंह को शिवाजी के खिलाफ भेजा, लेकिन शिवाजी ने अपनी चतुर रणनीतियों से हमेशा मराठा साम्राज्य की रक्षा की। राज्याभिषेक और ‘छत्रपति’ की उपाधि1674 में रायगढ़ के किले में उनका भव्य राज्याभिषेक हुआ।
शिवाजी हमेशा अपनी प्रजा और कर्मचारियों में कभी भेदभाव नहीं समझते थे हमेशा अपना साथी समझते थे ।34 साल के शासन काल में कभी भी प्रजा ने उनके विरुद्ध कभी कोई संघर्ष नहीं किया। उन्होंने बताया कि शिवाजी ने सभी धर्मो का सम्मान किया कभी भी किसी भी धर्म के लोगों पर  अत्याचार नहीं किया, सेना में भी धर्म का कोई भेदभाव नहीं था। उन्हें  ‘छत्रपति’  की उपाधि से नवाजा गया। शिवाजी महान योद्धा ही नहीं, बल्कि एक प्रजा-वत्सल और प्रगतिशील प्रशासक भी थे और उन्होंने मराठा नौसेना  का भी गठन किया था। उनकी प्रशासनिक और रणनीतिक नीतियां आज भी आधुनिक प्रबंधन और रक्षा रणनीतियों में प्रासंगिक हैं।छत्रपति शिवाजी महाराज का निधन 3 अप्रैल 1680 को हुआ था। वे अपने पीछे एक मजबूत और स्वतंत्र मराठा साम्राज्य छोड़ गए, जिसने आने वाले समय में भारतीय इतिहास की दिशा को बदल दिया।
यदि हम शिवजी के विचारों और सिद्धांतों पर  चलेंगे तो हम अपना सर्वश्रेष्ठ, समाज को अपने देश को और अपनी इस मातृभूमि को समर्पित करने में समर्थ और सक्षम हो सकेंगे। निश्चित ही अशोक पाठक जी के बौद्धिक उद्वोधन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहा।