सम्राट डाहिर का बलिदान राष्ट्रप्रेम का उत्तम उदाहरण है:सबनानी
Jun 24 2026
ग्वालियर। अपनी शूरवीरता से निरंतर सिन्ध पर अरबों के आक्रमण को असफल करने वाले सिन्धुपति सम्राट डाहिर और उनकी पत्नी व बेटियों का बलिदान राष्ट्रप्रेम का उत्तम उदाहरण है। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी ने चेम्बर सभागार में आयोजित सम्राट डाहिर को समर्पित सिन्धी काव्य गोष्ठी में कही। इस मौके पर अकादमी निदेशक राजेश वाधवानी ने कहा कि ऐसे आयोजनों में युवा पीढ़ी को अधिक संख्या में सहभागिता कर अपने समृद्ध व गौरवशाली इतिहास को जानने का प्रयास करना चाहिए।
सिंधी साहित्य अकादमी, मप्र संस्कृति परिषद भोपाल द्वारा सिन्धु सोशल एंड कल्चरल सोसायटी ग्वालियर के सहयोग से चेम्बर सभागार में आयोजित काव्य गोष्ठी में मध्यप्रदेश, गुजरात व छत्तीसगढ़ के ख्यातिप्राप्त सिन्धी भाषी कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य गोष्ठी का आरंभ ग्वालियर के कवि धर्मपाल मधुकर के रचना पाठ से हुआ। उन्होंने अपनी रचना में ‘हिकु सूरमा हो डाहिर, जंहिं डिनो बलिदान’ के माध्यम से सम्राट दाहिर के शौर्य को प्रस्तुत किया। इसके बाद इंदौर के नमोश तलरेजा ने ‘सिन्धू माता मुंहिंजी जीजल, तो ते सीस निवायां मां’ के जरिए सिन्धु का स्मरण किया और अपनी दूसरी रचना में वर्तमान शहरी लोगों और शहर के हालातों पर तंज कसते हुए रचना प्रस्तुत की। अहमदाबाद से आए मनोज चावला ने सम्राट दाहिर को याद करते हुए कहा ‘नालो ऊंचो, राजा डाहिर, ताजु सिंधु जो, राजा डाहिर। इसके बाद नर्मदापुरम से आए हास्य कवि महेश मूलचंदानी ने सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष करते हुए अपनी रचनाओं से उन्होंने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनके बाद इंदौर की डॉ. नादिया मसंद ने अपनी रचना में मातृभाषा का महत्व बताते हुए कहा ‘मूंखे फकुर आहे पहिंजी मिठड़ी बोली ते, जा सीखारी मूंखे अमाड़ पहिंजी मिथड़ी लोली में। अंत में नर्मदापुरम के अशोक जमनानी ने सिन्ध और सम्राट दाहिर को समर्पित करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की।
आयोजन में राजेश जयसिंघानी, राजेश वाटवानी, रोशन गाबरा, जीएल भोजवानी, डॉ. सीपी लाडकानी, दीपक जैसवानी, धीरज दिसेजा सहित सैकड़ों श्रोता उपस्थित थे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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